डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं आपकी भावप्रवण रचना – पानी की आस।)
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गगरी बाला भर रही, बीच नदी की धार।
देख उसे मन डर रहा, गिरे नहीं वो पार।।
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सूख स्रोत सारे गए, हमको होती पीर।
चट्टानों से जल दिखा, बहता नदिया नीर।
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लड़की प्यासी हो रही, कूप नीर की आस।
मटके में पानी भरे, उसे लगी जब प्यास।।
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संकट के इस दौर में, आई तेरे पास।
जोखिम कितना है बड़ा, बस पानी की आस।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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