डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं  आपकी भावप्रवण रचना  – पानी की आस।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३२६ – साहित्य निकुंज ☆

☆ पानी की आस ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

☆

गगरी बाला भर रही, बीच नदी की धार।

देख उसे मन डर रहा, गिरे नहीं वो  पार।।

* 

सूख स्रोत सारे गए, हमको होती  पीर।

चट्टानों से जल दिखा, बहता नदिया नीर।

 *

लड़की प्यासी हो रही, कूप नीर की आस।

मटके में पानी भरे, उसे लगी जब प्यास।।

 *

संकट के इस दौर में, आई तेरे पास।

जोखिम कितना है बड़ा, बस पानी की आस।।

☆

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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