श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय कविता – बढ़ती गर्मी अरु महंगाई.! आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # ३०९ ☆
☆ कविता – बढ़ती गर्मी अरु महंगाई.! ☆ श्री संतोष नेमा ☆
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बढ़ती गर्मी अरु महंगाई |
तेल भी ले रहा अंगड़ाई ||
नहीं नियंत्रण राज तंत्र का |
कौन लगाम लगाए भाई ||
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यू एस ए ईरान न झुकते |
कहाँ युद्ध से दोनों रुकते |
सबकी ऊंची नाक यहाँ पर |
यहाँ आम जन ही सब भुगते ||
हार्मोज पर नजर सभी की |
समझो सब इनकी चतुराई |
बढ़ती गर्मी अरु महंगाई ||
*
महंगाई की मार बहुत है |
आंसुओं में धार बहुत है ||
गर्मी में जब बहे पसीना |
लगता है तब खार बहुत है ||
बैठे नेता सब ए सी में |
मेहनतकश की क्या सुनवाई ||
बढ़ती गर्मी अरु महंगाई ||
*
आम आदमी की लाचारी |
महंगाई जिस पर है भारी ||
कैसे चलता घर गरीब का |
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© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार
आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 7000361983, 9300101799
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