स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी द्वारा रचित – “कविता – सरदार वल्लभ भाई पटेल…” । हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।)
☆ काव्य धारा # २७२ ☆
☆ सरदार वल्लभ भाई पटेल… ☆ स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ☆
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हे देशभक्त, कर्तव्यनिष्ठ, दृढ़व्रती अनूठे सेनानी
वल्लभ भाई पटेल तुम थे एक सच्चे नेता पर दानी।
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तब दूरदृष्टि शासन क्षमता हम सब में गर्व जगाती है
हर अग्नि परीक्षा के अवसर हमें पावन याद दिलाती है।।
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तुमने थी निभाई प्रमुख भूमिका देश को एक बनाने में
बिखरे छोटे रजवाड़ों को भारत के साथ मिलाने में।।
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नक्शे में भरने नया रंग एक अनुपम काम तुम्हारा है
इस कठिन काम हित सच मन से आभारी भारत सारा है।।
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तुम आजादी के बाद शीघ्र ही छोड़ हमें जो चले गए
कितने ही नए जंजालों में फंस हम औरों से छले गए।।
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जो काम रह गया, तब तुमसे वह काम आज भी बाकी है
पाने को किनारा तैर रहे पर हार रही तैराकी है।।
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दो अपनी सी दृढ़ता हमको हर उलझन को सुलझाने को
नई नई समस्याओं से लड़कर उन्हें सहज निपटाने को।।
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तुम अडिग रहे, डरा न सका न कोई जीवन संग्राम तुम्हें
करते हैं हे सरदार सभी हम बारम्बार प्रणाम तुम्हें।।
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© स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
ए २३३ , ओल्ड मीनाल रेजीडेंसी भोपाल ४६२०२३
मो. 9425484452
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




