सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता !! सावन अब जल बरसाओ !!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ११ ☆
☆ !! सावन अब जल बरसाओ !! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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तरस रही है रोज निगाहें, काले मेघा आ जाओ ।
आया पावन मास सुहाना,
सावन अब जल बरसाओ ।।
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रीते है सब ताल-तलैया, धरती भी तुम्हें पुकारे ।
कल-कल करते झरनों के अब, मधुरिम से गीत सुना रे ।।
रिमझिम-रिमझिम जमकर बरसो, गीत खुशी के मिल गाओ ।
आया पावन मास सुहाना,
सावन अब जल बरसाओ ।।
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तेरे आने की आहट से, मन पुलकित हो जाते ।
धरती करती श्रृंगार नया, अरु मोर पपीहा गाते ।।
छुपा रखी है जो अंतस में, वो प्रेम सुधा झलकाओ ।
आया पावन मास सुहाना,
सावन अब जल बरसाओ ।।
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बाग-बाग में झूले डलते, झूले है राधा कृष्णा ।
तृप्त हृदय सबके हो जाते, मिट जाती सारी तृष्णा ।।
करो जलाभिषेक भोले का, गंग धार को ले आओ ।
आया पावन मास सुहाना,
सावन अब जल बरसाओ ।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





