श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “अंधकार…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २७९ ☆
☆ # “पलकों ने खता की…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆
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पलकों ने खता की
आंखों ने सजा पाई
दिल से हाय निकली
आंखें हैं डबडबाई
कुछ टूट गया अंदर
कुछ टूट गया बाहर
टूटते हुए रिश्तों ने
हकीकत है समझाई
चेहरे पर रोष है
इरादों में जोश है
बहते हुए लावे ने
हर भीख है ठुकराई
शब्दों के हंसी फंदे
सब लूटने के धंधे
बहेलियां ने मुखौटे में
सूरत है छुपाई
अंगारों पर चल रहे हैं
मुफलिसी में पल रहे हैं
यह चुप्पी यह खामोशी
यह किस्मत कहां ले आई
अब टूट रहा है सब्र
बन जाए यहीं पर कब्र
सरमायेदारों के खिलाफ
“श्याम” तुमने आवाज है उठाई
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© श्याम खापर्डे
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