श्रीमति अभिलाषा श्रीवास्तव
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश की निवासी लेखिका व कवयित्री श्रीमती अभिलाषा श्रीवास्तव जी एक प्रेरणादायक महिला हैं। साहित्य की सेवा में निरंतर रत | आपको 2024 में अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मान पत्र से नवाजा गया। विशेष सम्मान : एक्सीलेंट कवयित्री अवार्ड से सम्मानित तथा पुरस्कृत |उनके द्वारा संवाद टीवी पर फाग प्रसारण में प्रस्तुत किया गया और विभिन्न राज्यों के प्रमुख अखबारों व पत्रिकाओं में उनकी कविता, कहानी और आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी लेखनी में समाज के प्रति संवेदनशीलता और सृजनात्मकता का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
☆ कविता ☆ आशीर्वाद ☆ श्रीमति अभिलाषा श्रीवास्तव ☆
अक्सर मिलने वाला आशीर्वाद भी
दूजे के खाते में आया
फिर भी
एक अलौकिक हर्ष मन में छाया
दूधो नहाओ पूतों फलों
व कभी सदा सुहागन रहो के आशीर्वाद ने
स्त्रियों के माथे पे हाथ फेरा
अपनी अपनी हाथों के मुट्ठी में सबने प्रेम बांधा
लेकिन हर बार स्त्रियों के खाते में
दूजे के लिए जीने का हुनर आया
क्यो कभी किसी ने कहा नहीं उसको भी
खुद की जिंदगी जीयो
क्योंकि पीढ़ी दर पीढ़ी जानती है
‘स्त्रियों के लिए ही गृहस्थी मकान बनीं है
बात अगर पुरुषों पे आतीं तो
धर्मराज युधिष्ठिर जैसे दो अर्धांगिनी भी निर्णय सही लगता
क्या वस्तु थीं स्त्रियाँ
जो भाई भाई मे वस्तुओं के जैसे बांटी गई
अरे पंचाली स्त्री थी
तभी तो बंट कर भी बंधन में बंधीं रह गई
तुलसी सीता और अहिल्या पुरुषों के छल में छली गई
अपने स्त्रीत्व के आगे इतिहास गढ़ गई
हाँ स्त्री जानती है
तभी तो युगों युगों से यही आशीर्वाद स्त्री को देतीं गई
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© श्रीमति अभिलाषा श्रीवास्तव
गोरखपुर, उत्तरप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




