श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘बाबुल के बुलावे पर…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # ११८ ☆
☆ बाबुल के बुलावे पर… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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तेरी इस दुनिया में, पल का ठिकाना है,
बाबुल के बुलावे पर, दूर चले जाना है।
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दिया जले बाती से, तेल का समाना है,
तेल खत्म होते ही, दिया बुझ जाना है।
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बाबुल के बुलावे पर, दूर चले जाना है,
अंगना में चिड़िया है, जब तक दाना है।
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दाना खत्म होते ही, चिड़िया उड़ जाना है,
बाबुल के बुलावे पर, दूर चले जाना है।
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रंगमंच दुनिया है, कला का जमाना है,
रोल खत्म होते ही, पर्दा गिर जाना है।
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बाबुल के बुलावे पर, दूर चले जाना है,
राज की ये बात कह दूं, राज ये बताना है।
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अच्छे काम करो जग में, नाम रह जाना है,
बाबुल के बुलावे पर, दूर चले जाना है।
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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