आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – “गीत – किसका पूजन करूँ?”)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २८६ ☆

☆ गीत – किसका पूजन करूँ? ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

राम अनगिनत

किसका पूजन करूँ

न पूजूँ किसको कहिए?

.

भरमाते आराम-विराम

न सत्य सूझता,

मन कहता आराम हराम

न कर्म छूटता।

कर्म करो तो मिले कर्मफल

मुक्ति न पाई-

मकड़ा जाला बुनता, घुटता,

फँसकर मरता।।

श्याम अनगिनत

किसकी बंसी सुनूँ

सुनूँ नहिं किसकी कहिए?

राम अनगिनत

किसका पूजन करूँ

न पूजूँ किसको कहिए?

.

कभी सुहाते, कभी न भाते

रिश्ते-नाते,

कभी साथ दें, कभी दगा दे

दूर हटाते।

दुश्मन नहीं पुत्र अपना ही

आग लगाता-

पुत्र मिले अर्जी ले मंदिर- मस्जिद जाते।।

काम सकाम

अकाम अनवरत

क्या कब सहिए, तहिए, गहिए?

राम अनगिनत

किसका पूजन करूँ

न पूजूँ किसको कहिए?

.

गीत-अगीत-प्रगीत

न जानूँ, नहिं रच पाता,

व्यथा-कथा तन की कहता

जन बनकर ज्ञाता।

शब्दों की ले आड़, बुद्धि

खुद ही भरमाई-

तर्क वितर्क कुतर्क सत्य सब

दूर हटाता।।

नाम अनाम सुनाम

प्रणाम कलाम सुमिरिए।

राम अनगिनत

किसका पूजन करूँ

न पूजूँ किसको कहिए?

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

१९.११.२०२५

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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