डॉ राकेश ‘चक्र’
(हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. राकेश ‘चक्र’ जी की अब तक लगभग तेरह दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें ( बाल साहित्य व प्रौढ़ साहित्य ) तथा लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन।लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन। कई कृतियां पंजाबी, उड़िया, तेलुगु, अंग्रेजी आदि भाषाओँ में अनूदित । कई सम्मान/पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा बाल साहित्य के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य श्री सम्मान’ और उत्तर प्रदेश सरकार के हिंदी संस्थान द्वारा बाल साहित्य की दीर्घकालीन सेवाओं के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य भारती’ सम्मान, अमृत लाल नागर सम्मान, बाबू श्याम सुंदर दास सम्मान तथा उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संस्थान के सर्वोच्च सम्मान सुमित्रानंदन पंत, उत्तर प्रदेश रत्न सम्मान सहित बारह दर्जन से अधिक राजकीय प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं गैर साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित एवं पुरुस्कृत।
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आप “साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र” के माध्यम से उनका साहित्य प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र – # ३०५ ☆
☆ बाल गीत – लप्पा – लोरी गाए राम… ☆ डॉ राकेश ‘चक्र’ ☆
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लप्पा – लोरी गाए राम।
मंद – मंद मुस्काए राम।।
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कभी पकड़ अंगुली इतराएँ।
तनिक प्रेमरस वह बरषाएँ।।
हमको मन – मन भाए राम।।
लप्पा – लोरी गाए राम।।
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कभी गाल पर करें गुदगुदी।
थोड़े नटखट बढ़े धुकधुकी।।
अपनेपन में नहाए राम।।
लप्पा – लोरी गाए राम।।
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पकड़ – पकड़ दादा की टोपी।
बंसी धुन पर नाचें गोपी।।
निप्पल चूसें भाए राम।।
लप्पा – लोरी गाए राम।।
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ठुमक – ठुमक वह घुटअन चलते।
घुँघरू , छल्ला टुन – टुन बजते।
मंत्र सुनें मुस्काए राम।
लप्पा – लोरी गाए राम।।
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© डॉ राकेश चक्र
(एमडी,एक्यूप्रेशर एवं योग विशेषज्ञ)
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