डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – गुरु।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३३२ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के मुक्तक – नारी ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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गुरु की कर आराधना, मिले गुरू से ज्ञान।
पाना ईश्वर को अगर, करो गुरू का मान।।
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मात पिता पहले गुरू, हुआ ज्ञान संचार।
शिक्षा के हर क्षेत्र में, मिला हमें आधार।।
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रखा कदम साहित्य में, पकड़ा पिता ने हाथ।
मेरे साथ है आपका, आशीषों का साथ।।
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गाते है हम तो सदा, गुरुवर का ही गान।
करते गुरु की वंदना, करें सदा सम्मान।।
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गुरु के चरणों में सदा, है सारा संसार।
कृपा गुरू की हो रही, जीवन है साकार।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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