सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – शारदे प्यार दो…।
रचना संसार # १०५
☆ गीत – जगपालक हो कुंज बिहारी… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ☆
(गगनांगना छंद)
(मात्रा 25, यति-16/9पदान्त 212)
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अनुपम अद्भुत छवि न्यारी है, खेवनहार हो।
जगपालक हो कुंज बिहारी, प्रभु करतार हो।।
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भवसागर से पार उतारो, थामो हाथ भी।
मनहर छवि उर में बसती है, दीनानाथ भी।।
विनय यही है जीवन में हो, हरपल साथ भी।
चरण -कमल की रज मिल जाए, प्रिय यदुनाथ भी।।
नवरस की बरसा प्रभु कर दो, सृजन अपार हो।
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निर्मल निश्छल प्रीति हमारी, करते प्रार्थना।
विपदा आन पड़ी है कान्हा, हमको थामना।।
काम क्रोध लोभ मोह तज कर, करते कामना।
आकर शरण श्याम अब ले लो, समझो भावना।।
करुणाकर प्रभु तुम कहलाते, अब उपकार हो।
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सृष्टि रचियता हो बनवारी, प्रुभु विश्वास भी।
जगत नियंता रास -बिहारी , मेरी आस भी।।
स्वामी तुम अन्तर्यामी हो, उर में वास भी।
मंगलकारी गिरधारी प्रभु, रहते पास भी।।
गीता का नित पाठ पढ़ाते, चिंतन सार हो।।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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