श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “नई रोशनी आई है…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २७५ ☆
☆ # “नई रोशनी आई है…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆
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उदास आंखों में नई रोशनी आई है
नई सुबह ने एक उम्मीद जगाई है
अंधेरे के बादल
धीरे-धीरे छट रहे हैं
दुख भरे दिन
धीरे-धीरे कट रहे हैं
राह में तूफान
धीरे-धीरे घट रहे हैं
हर किरण ने मन में आस बधाई है
नई सुबह ने उम्मीद जगाई है
आसमान भी अब झुकने लगा है
तारों से उनका हाल पूछने लगा है
धरती का उन्माद देखकर छुपने लगा है
शायद उसे अपनी भूल समझ आई है
नई सुबह ने एक उम्मीद जगाई है
किसका यहां हमेशा
के लिए ठिकाना है
जो आया है
उसे एक दिन जाना है
क्या खोना और क्या पाना है
कुदरत ने अपनी बिसात बिछाई है
नई सुबह ने एक उम्मीद जगाई है
नए जोश ने
कई तख्त बदल डाले हैं
नसीहत है उनको
जो मुगालता पाले हैं
हर तानाशाह ने
आखिर में हथियार डालें है
याद रहते हैं वह जिन्होंने दिलों में
प्रीत की ज्योत जलाई है
नई सुबह ने एक उम्मीद जगाई है
उदास आंखों में नई रोशनी आई है/
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© श्याम खापर्डे
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