सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – जहरीली हवाएँ…।
रचना संसार # १०६
☆ गीत – जहरीली हवाएँ… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ☆
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पथ सभी अवरुद्ध होते,
नेत्र भी देते छलावे।
दोष अब किसका कहें हम,
झूठ निकले आज दावे।।
रक्त भी पानी हुआ है,
अस्थि- पंजर आज तन भी।
पाश यम का बाँधता है,
रूह काँपे और मन भी।।
हो रही चर्चा गली में,
कर चुके देखो दिखावे।
मौसमी बदलाव लाया,
साथ जहरीली हवाएँ।
नित नए चलचित्र चलते,
आसुरी ये आपदाएँ।।
सिर शनीचर है चढ़ा भी,
लोग देते हैं भुलावे।
मौत से परिणय हुआ है,
नृत्य तांडव हो रहा है।
ढेर लाशों के लगे हैं,
श्वान बैठा रो रहा है।।
सिर झुका झिंगुर चले अब,
दादुरों के हैं बुलावे।।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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