सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’

(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता सैनिक भारत माता के!!)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # १४ ☆

☆ सैनिक भारत माता के!! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆

मार भगाते सीमा से ही,

आता जो भी दुश्मन पास ।   

सैनिक ये भारत माता के,

वीर साहसी सबसे खास ।।

*

रक्षा करते हैं सरहद की,

छोड़ चले अपना घर बार ।

मारे देखो अरि को ऐसे,‌

शोणित बहता सीमा पार ‌‌।।

केवल हित भारत का चाहे,

नहीं हृदय में दूजी आस ।

सैनिक ये भारत माता के,

वीर साहसी सबसे खास ।।

*

राह निहारे बूढ़ी मैया,

खड़े हुए हैं बाबा द्वार ।

घर कब आओगे प्रियतम जी,

सजनी पूछे है हर बार ।।

कर्तव्यों को पूरा करके,

 आऊंगा रखना विश्वास ।

सैनिक ये भारत माता के,

वीर साहसी सबसे खास ।।

*

तन मन सब न्योछावर करके,

मातृभूमि की रखते आन ।

बनता है कर्तव्य हमारा,

शीश झुका कर दे सम्मान ।।

बांँध कफन वह सर पर रखते,

नहीं कराते हैं आभास ।

सैनिक ये भारत माता के,

वीर साहसी सबसे खास ।।

© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”

झालरापाटन राजस्थान

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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