डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – प्यार ।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३०१ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – प्यार ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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नेह छिपा दिल में रहा, नहीं बताया यार।
नयनों से बस देखते, बसता उरमें प्यार।।
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देखा हमने ख्वाब तो, तुम तो मेहरबान।
फिसल गया वो हाथ से, रूठ गए अरमान।।
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देख रहे है हम उन्हें, नहीं सँभलते आज।
प्यार नहीं उनको मिला, पिछड़ा हुआ समाज।।
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दाग लगा है प्यार का, दामन बिल्कुल साफ।
बढ़ती फिर भी मुश्किलें, करें नहीं वो माफ।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






