श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता मेरा हौसला।)

? कविता – मेरा हौसला…  ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

पंख मिले, हौसला मिला,

अभी उड़ान बाकी है, ,

आसमां तो छू लिया,

चांद आगोश, लेना बाकी है,

डोर विश्वास की थाम ली मैंने,

अभी अंकुश हटाना बाकी है,

पंख तो फैला ही लिए हैं,

इतिहास रचना बाकी है,

दिए की बेखौफ लहराती लौ,

तूफानों से बचाना बाकी है,

सपने तो सुहाने सज गए,

सपनों में रंग भरना बाकी है,

इस सुहाने सफर में,

तेरा हमसफ़र बनना बाकी है,

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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