श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “तरक़्क़ी की हक़ीक़त वो नहीं जो आंकड़े कहते…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३१ ☆
तरक़्क़ी की हक़ीक़त वो नहीं जो आंकड़े कहते… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
☆
ये भीगी और सियह जुल्फें कहानी अपनी कहती हैं
तुम्हारी मदभरी आँखें कहानी अपनी कहती हैं
*
बताएं क्या कि मँहगाई ने कैसे घर उजाड़ा है
टपकती छत से बरसातें कहानी अपनी कहती हैं
*
तरक़्क़ी की हक़ीक़त वो नहीं जो आंकड़े कहते
दबे कुचलों की ये आहें कहानी अपनी कहती है
*
सयानी घर पे हो बेटी तो कितनी फ़िक़्र बाबुल को
तनी जो झुक गई मूछें कहानी अपनी कहती है
*
ये सीधपन ये ख़ामोशी दलीलें हैं शराफ़त की
लचकती फल भरी डालें कहानी अपनी कहती हैं
*
नई कोपल से पेड़ों का पुराना पन नहीं छिपता
तने की खुरदरी छालें कहानी अपनी कहती हैं
*
मुहब्बत का अरुण इज़हार वो करता नहीं मुझसे
मुहब्बत से भरीआँखें, कहानी अपनी कहती हैं
☆
© श्री अरुण कुमार दुबे
सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश
सिरThanks मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





