श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “सदियों से हमने किया। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # २०२ – सदियों से हमने किया ☆

सदियों से हमने किया, विश्व शांति का जाप।

जल थल नभ पाताल के, दूर किये संताप।।

 *

वैदिक मंत्रों को जपा, औ गाया नित गान।

आदिकाल से तब बनी, भारत की पहचान।।

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विश्व शांति सद्भावना, से ही जग उद्धार।

खुशहाली की थाप संग,संकट हटें हजार।।

 *

संस्कृतियाँ बसती रहीं, सदा मिला सम्मान।

अतिथि देव होता यहाँ, जग जाहिर पहचान।।

 *

शांति शक्ति आराधना, हिन्दुस्ताँ के स्त्रोत।

भारत का दर्शन रहा, सदियों उड़े कपोत।।

 *

पवन मेघ गिरि वृक्ष सब, ईश्वर के उपहार।

इन सबकी आराधना, संस्कृति के आधार।।

 *

विक्रमादित्य चाणक्य से, सूरवीर गंभीर।

राणा साँगा क्षत्रपति, पोरुष से हैं वीर।।

 *

अवतारों की भूमि है, ऋषियों का यशगान।

भारत में मिलकर सभी, गाते मंगल गान।।

 *

राम कृष्ण गौतम शिवा, नानक व महावीर।

भारत धरती धन्य है, सूफी संत फकीर।।

 *

वेद और उपनिषद में, विश्व शांति संदेश।

ज्ञान योग विज्ञान में, पारंगत यह देश।।

राष्ट्रसंघ में छा गया, अपना अनुपम देश।

लुभा रहा है विश्व को, भारत का गणवेश।।

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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