श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “मौत से मुमकिन नहीं है“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३३ ☆

✍ मौत से मुमकिन नहीं है… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

मुझको आया ही नहीं है दिल किसी का जीतना

ज़िंदगी में सबसे मुश्किल है भरोसा जीतना

इसके फंदे में फसा जो हारता है ज़ीस्त को

मौत से मुमकिन नहीं है दाँव अपना जीतना

 *

हार में भी जीत से मिलती उसे बढ़कर ख़ुशी

एक बेटे से न कोई बाप चाहा जीतना

 *

हो मुखालिफ़ आपके कोई भी छोटा या बड़ा

उसको तदवीरों से मुमकिन हो सकेगा जीतना

 *

लोक हित में भस्म होना काम को मंजूर था

जानता था शिव से नामुमकिन है उसका जीतना

 *

हौसले को छोड़ उसने मान आधी हार ली

जंग से पहले ही जो मुश्किल है सोचा जीतना

 *

आदमी कठपुतलियों सा नाचता रहता है बस

वक़्त तय करता है जब क्या हार है क्या जीतना

 *

अय अरुण हर जीत तेरी कितनी आहों से भरी

बुद्ध जैसा खास होता अपने मन का जीतना

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

सिरThanks मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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