सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – शारदे प्यार दो…।
रचना संसार # ९९
गीत – शारदे प्यार दो… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
☆
है विनय,आपसे,भक्त को तार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
*
ज्ञान हो,ध्यान हो,वेद की साधना।
हम करें,नित्य ही,मातु आराधना।।
तेज हो,सूर्य सा,कर कृपा हैं शरण।
नंदिता,पूजिता,हैं गिरे हम चरण।।
मीत हो,जीत का,आप उपहार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
*
राह हम,जो चलें,सत्य का पाथ हो।
द्वेष मन,में न हो, श्रेष्ठ का साथ हो।।
हो हृदय,भी विमल,मातु भयहारिणी।
मंत्र हो,प्रेम का,हो जगततारिणी।।
कंठ पे,नाम हो,माँ अमिय धार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
*
यह धरा,देश की,मातु है पावनी।
ताज हो,सिर सदा,शांति की आसनी।।
हम सदा,हों सफल,पूर्ण हर काम हो।
ओम ही,ओम हो,माँ अमर नाम हो।।।
पाप का,नाश हो,हाथ तलवार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
*
पाठ हम,तो पढ़े,मातु बस प्रीति का।
हो सृजन,आप ही,छंद हो गीतिका।।
बुद्धि दो,शुद्धि दो,हाथ माँ थामना।
सब सुखद, हो सरस,बस यही कामना।।
लेखनी,को सदा,आप विस्तार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
☆
© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268
ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





