श्री प्रतुल श्रीवास्तव
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री प्रतुल श्रीवास्तव, भाषा विज्ञान एवं बुन्देली लोक साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, शिक्षाविद् स्व.डॉ.पूरनचंद श्रीवास्तव के यशस्वी पुत्र हैं। हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतुल श्रीवास्तव का नाम जाना पहचाना है। इन्होंने दैनिक हितवाद, ज्ञानयुग प्रभात, नवभारत, देशबंधु, स्वतंत्रमत, हरिभूमि एवं पीपुल्स समाचार पत्रों के संपादकीय विभाग में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। साहित्यिक पत्रिका “अनुमेहा” के प्रधान संपादक के रूप में इन्होंने उसे हिंदी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दी। आपके सैकड़ों लेख एवं व्यंग्य देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपके द्वारा रचित अनेक देवी स्तुतियाँ एवं प्रेम गीत भी चर्चित हैं। नागपुर, भोपाल एवं जबलपुर आकाशवाणी ने विभिन्न विषयों पर आपकी दर्जनों वार्ताओं का प्रसारण किया। प्रतुल जी ने भगवान रजनीश ‘ओशो’ एवं महर्षि महेश योगी सहित अनेक विभूतियों एवं समस्याओं पर डाक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण भी किया। आपकी सहज-सरल चुटीली शैली पाठकों को उनकी रचनाएं एक ही बैठक में पढ़ने के लिए बाध्य करती हैं।
प्रकाशित पुस्तकें –ο यादों का मायाजाल ο अलसेट (हास्य-व्यंग्य) ο आखिरी कोना (हास्य-व्यंग्य) ο तिरछी नज़र (हास्य-व्यंग्य) ο मौन
आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय व्यंग्य “नायक नहीं खलनायक है तू”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # २९ ☆
☆ हास्य-व्यंग्य ☆ “ट्रम्प, मेलोनी और ” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆
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हाल ही में फ्रांस में संपन्न जी 7 शिखर सम्मेलन में इटली की लोकप्रिय, खूबसूरत प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ फोटो खिंचवाकर मुंह चलाने की बुरी आदत से लाचार अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मेलोनी को दुखी और नाराज कर दिया। ट्रंप के बयान ने मेलोनी सहित दुनियाभर की महिलाओं के स्वाभिमान पर चोट पहुंचाने का काम कर दिया कि “मेलोनी मेरे साथ फोटो खिंचवाने की भीख मांग रही थी। मैं समझता था कि ट्रंप भले ही राजनीतिक रूप से परिपक्व न हो किंतु वे राजनीति से पहले लम्बे समय तक ग्लैमर की दुनिया से जुड़े रहे हैं अतः महिलाओं की मानसिकता और प्रशंसा पसंद प्रकृति से अच्छी तरह परिचित होंगे, किंतु मेरी धारणा गलत निकली, उनकी समझ भी भारत के एक युवा नेता के जैसी ही है।
यदि वे यह कहते कि मेलोनी के साथ फोटो खिंचवाकर उन्हें गर्व की अनुभूति हुई वे जितनी अच्छी राजनीतिज्ञ हैं उतनी ही सहृदय भी हैं, यदि वे कहते कि मेलोनी जी मैं आपकी फोटो देखकर तनाव मुक्त हो जाता हूं, तो शायद मेलोनी भी खुश होकर ट्रंप की प्रशंसक बन जातीं, लेकिन ट्रंप इस मामले में भी अनाड़ी साबित हुए।
भाइयों, मुझे तो ट्रंप के बयान से मेलोनी और भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मधुर संबंधों के प्रति जलन की बू आ रही है। वे शायद मोदी जी सहित सारी दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि जिसको मोदी टॉफियां देकर खुश करते हैं और मुस्कुराते हुए क्लोजअप फोटो खिंचवाते हैं वह उनके साथ फोटो खिंचवाने की भीख मांगती है, लेकिन मोदी की बात निराली है। ट्रंप क्या दुनिया का कोई भी नेता किसी भी मामले में मोदी की बराबरी नहीं कर सकता। मोदी उस देश के हैं जहां मित्रों के लिए कहा जाता है “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे ” और महिला मित्रों की प्रशंसा में कहा जाता है “चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल, एक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल। ” ट्रंप और मोदी में भला क्या मुकाबला ? दुनिया जानती है कि “मोदी है तो मुमकिन है”। उधर अमेरिका के 80 वर्षीय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को मेलोनी ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है और अप्रिय बयानबाजी का युद्ध छेड़ दिया है। लोग सच ही कहते हैं कि बढ़ती उम्र कई लोगों की बुद्धि भ्रष्ट कर देती है। ट्रंप मेलोनी की नजरों में भी खलनायक बन गये। “नायक नहीं खलनायक है तू, जुल्मी बड़ा दुखदायक है तू”।
© श्री प्रतुल श्रीवास्तव
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