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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि – साथी हाथ बढ़ाना ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  ☆ संजय दृष्टि  – साथी हाथ बढ़ाना ☆ ( श्री संजय भारद्वाज जी  द्वारा तीन वर्ष पूर्व गणतंत्र दिवस पर लिखी इस पोस्ट को आज साझा कर रहा हूँ। इसका विषय सदैव सामयिक ही रहेगा, ऐसा प्रतीत होता है। फिर पहला पग तो कभी भी उठाया जा सकता है। ) विगत दिवस गण की रक्षा के लिए  गांदरबल में भारी हिमपात के बीच आतंकियों...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सकारात्मक सपने – #34 – उम्मीदें ☆ सुश्री अनुभा श्रीवास्तव

सुश्री अनुभा श्रीवास्तव  (सुप्रसिद्ध युवा साहित्यसाहित्यकार, विधि विशेषज्ञ, समाज सेविका के अतिरिक्त बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी  सुश्री अनुभा श्रीवास्तव जी  के साप्ताहिक स्तम्भ के अंतर्गत हम उनकी कृति “सकारात्मक सपने” (इस कृति को  म. प्र लेखिका संघ का वर्ष २०१८ का पुरस्कार प्राप्त) को लेखमाला के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। साप्ताहिक स्तम्भ – सकारात्मक सपने के अंतर्गत आज अगली कड़ी में प्रस्तुत है  “उम्मीदें”।  इस लेखमाला की कड़ियाँ आप प्रत्येक सोमवार को पढ़ सकेंगे।)   Amazon Link for eBook :  सकारात्मक सपने   Kobo Link for eBook        : सकारात्मक सपने ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सकारात्मक सपने  # 34 ☆ ☆ उम्मीदें ☆ लोकतंत्र का पंचवर्षीय महोत्सव पूरा हुआ. करोड़ो का सरकारी खर्च हुआ जिसके आंकड़े शायद सूचना के अधिकार के जरिये कोई भी कभी भी निकलवा सकता है, पर कई करोड़ो का खर्च पार्टियो और उम्मीदवारो ने ऐसा भी किया है जो कुछ वैसा ही है कि "घी कहां गया खिचड़ी में.." व्यय के इस सर्वमान्य सत्य को जानते हुये भी हम अनजान बने रहना चाहते है. शायद यही "हिडन एक्सपेंडीचर"  राजनीति की लोकप्रियता का कारण भी है. सैक्स के बाद...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच – #32 ☆ भवसागर ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज    (“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से इन्हें पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।” हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली  कड़ी । ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच # 32 ☆ ☆ भवसागर  ☆ स्थानीय बस अड्डे के पास सड़क पार करने...
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हिंदी साहित्य – आलेख ☆ अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन ☆ कैप्टन प्रवीण रघुवंशी, एन एम्

कैप्टन प्रवीण रघुवंशी, एन एम् (हम कैप्टन प्रवीण रघुवंशी जी द्वारा ई-अभिव्यक्ति के साथ  समय समय पर उनकी साहित्यिक और कला कृतियों को साझा करने के लिए उनके बेहद आभारी हैं। आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र कैप्टन प्रवीण जी ने विभिन्न मोर्चों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर पर देश की सेवा की है। वर्तमान में सी-डैक के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एचपीसी ग्रुप में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं साथ ही विभिन्न राष्ट्र स्तरीय परियोजनाओं में शामिल हैं।  कुछ दिन पूर्व, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के तत्वावधान में, न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, दक्षिण एशियाई भाषा कार्यक्रम और कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहयोग से दिल्ली विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया । इस सन्दर्भ में प्रस्तुत है उनका विशेष आलेख 'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन'. ) ☆ अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन☆ कुछ दिन पूर्व, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के तत्वावधान में, न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, दक्षिण एशियाई भाषा कार्यक्रम और कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहयोग से दिल्ली विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया था।  सम्मेलन का...
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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि – तेज धूप ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  ☆ संजय दृष्टि  – तेज धूप ☆   एसी कमरे में अंगुलियों के इशारे पर नाचते तापमान में चेहरे पर लगा लो कितनी ही परतें, पिघलने लगती है सारी कृत्रिमता चमकती धूप के साये में, मैं सूरज की प्रतीक्षा करता हूँ जिससे भी मिलता हूँ चौखट के भीतर नहीं तेज़ धूप में मिलता हूँ।   ©  संजय भारद्वाज, पुणे 7:22 बजे, 25.1.2020   ☆ अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ आशीष साहित्य # 27 – अश्वत्थामा ☆ श्री आशीष कुमार

श्री आशीष कुमार (युवा साहित्यकार श्री आशीष कुमार ने जीवन में  साहित्यिक यात्रा के साथ एक लंबी रहस्यमयी यात्रा तय की है। उन्होंने भारतीय दर्शन से परे हिंदू दर्शन, विज्ञान और भौतिक क्षेत्रों से परे सफलता की खोज और उस पर गहन शोध किया है। अब  प्रत्येक शनिवार आप पढ़ सकेंगे  उनके स्थायी स्तम्भ  “आशीष साहित्य”में  उनकी पुस्तक  पूर्ण विनाशक के महत्वपूर्ण अध्याय।  इस कड़ी में आज प्रस्तुत है   “ अश्वत्थामा ”।) Amazon Link – Purn Vinashak ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ आशीष साहित्य – # 27 ☆ ☆ अश्वत्थामा ☆ महाभारत के युद्ध में अश्वत्थामा ने सक्रिय भाग लिया था। महाभारत युद्ध में वह कौरव-पक्ष का एक सेनापति था। उसने भीम-पुत्र घटोत्कच (अर्थ : गंजा व्यक्ति,उसका नाम उसके सिर की वजह से मिला था, जो केशो से वहींन था और एक घट, मिट्टी का एक पात्र की तरह के आकार का था, घटोत्कच भीम और हिडिंबा पुत्र था और बहुत बलशाली था) को परास्त किया तथा घटोत्कच पुत्र अंजनपर्वा(अर्थ : अज्ञात त्यौहार, उसे यह नाम मिला क्योंकि उसके जन्म के समय...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य # 31 ☆ खामोशी और आबरू ☆ – डॉ. मुक्ता

डॉ.  मुक्ता (डा. मुक्ता जी हरियाणा साहित्य अकादमी की पूर्व निदेशक एवं  माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत हैं।  साप्ताहिक स्तम्भ  “डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक  साहित्य” के माध्यम से आप  प्रत्येक शुक्रवार डॉ मुक्ता जी की उत्कृष्ट रचनाओं से रूबरू हो सकेंगे। आज प्रस्तुत है डॉ मुक्ता जी का आलेख “खामोशी और आबरू”.  डॉ मुक्ता जी का यह विचारोत्तेजक लेख  हमें  साधारण मानवीय  व्यवहार से रूबरू कराता है।  इस आलेख का कथन "परिवार, दोस्त व रिश्ते अनमोल होते हैं। उनके न रहने पर उनकी कीमत समझ आती है और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए खामोशी के आवरण की दरक़ार है, क्योंकि वे प्रेम व त्याग की बलि चाहते हैं" ही इस आलेख का सार है। डॉ मुक्त जी की कलम को सादर नमन।  कृपया इसे गंभीरता से आत्मसात करें एवं अपने विचार कमेंट बॉक्स में अवश्य  दर्ज करें )     ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य – # 31☆ ☆ खामोशी और आबरू ☆ 'शब्द और सोच दूरियां बढ़ा देते हैं, क्योंकि कभी हम समझ नहीं पाते, कभी...
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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि – मनुष्य देह ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  ☆ संजय दृष्टि  – मनुष्य देह  ☆ (श्री संजय भारद्वाज जी द्वारा नव वर्ष पर निमंत्रण (प्रबोधन और सत्संग) से साभार।) (संजय उवाच की प्रस्तुति - तुम्हारे भीतर एक संत बसा है की निम्न पंक्तियाँ अपने आप में ही अद्भुत एवं सशक्त रचना है। )   तुम्हारे भीतर बसा है एक सज्जन और एक दुर्जन।  84 लाख योनियों के बाद मिली मनुष्य देह में दुर्जन को मनमानी...
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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ गांधी चर्चा # 12 – हिन्द स्वराज से  (गांधी जी और शिक्षा) ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक   (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचानेके लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है.  आदरणीय श्री अरुण डनायक जी  ने  गांधीजी के 150 जन्मोत्सव पर  02.10.2020 तक प्रत्येक सप्ताह  गाँधी विचार, दर्शन एवं हिन्द स्वराज विषयों से सम्बंधित अपनी रचनाओं को हमारे पाठकों से साझा करने के हमारे आग्रह को स्वीकार कर हमें अनुग्रहित किया है.  लेख में वर्णित विचार  श्री अरुण जी के  व्यक्तिगत विचार...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सकारात्मक सपने – #33 – सड़क और यातायात ☆ सुश्री अनुभा श्रीवास्तव

सुश्री अनुभा श्रीवास्तव  (सुप्रसिद्ध युवा साहित्यसाहित्यकार, विधि विशेषज्ञ, समाज सेविका के अतिरिक्त बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी  सुश्री अनुभा श्रीवास्तव जी  के साप्ताहिक स्तम्भ के अंतर्गत हम उनकी कृति “सकारात्मक सपने” (इस कृति को  म. प्र लेखिका संघ का वर्ष २०१८ का पुरस्कार प्राप्त) को लेखमाला के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। साप्ताहिक स्तम्भ – सकारात्मक सपने के अंतर्गत आज अगली कड़ी में प्रस्तुत है  “सड़क और यातायात ”।  इस लेखमाला की कड़ियाँ आप प्रत्येक सोमवार को पढ़ सकेंगे।)     Amazon Link for eBook :  सकारात्मक सपने   Kobo Link for eBook        : सकारात्मक सपने   ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सकारात्मक सपने  # 33 ☆ ☆ सड़क और यातायात ☆ रोटी, कपड़ा, मकान की ही तरह सार्वजनिक विकास के लिये बिजली पानी और कम्युनिकेशन आज अनिवार्य बन चुके हैं. सड़के वे शिरायें है जो देश को, एक सूत्र में जोड़ती हैं. सड़कें संस्कृति की संवाहक हैं. स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनायें इसी उद्देश्य से चलायी जा रही हैं. सड़कें केन्द्र व राज्य दोनो सरकारो का संयुक्त विषय है. सरकारें अरबों रुपयों का वार्षिक बजट सड़को पर व्यय कर...
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