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ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ आज समवेत प्रयासों की सकारात्मकता जरूरी है ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद   ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ आज समवेत प्रयासों की सकारात्मकता जरूरी है ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆ प्रिय मित्रो, यह सदियों में होने वाला अत्यंत दुष्कर समय है । जहाँ हम पड़ोस की किसी एक अकाल मृत्यु से विचलित हो जाते थे उसी देश मे अब तक सवा तीन लाख मृत्यु कोरोना से हो चुकीं हैं , यदि अब दुनिया को ग्लोबल विलेज मानते हैं तो आंकड़े गम्भीर हैं । और यह तो केवल मृत्यु के आंकड़े हैं । कितने ही लोग बुरी तरह से स्वास्थ्य , आर्थिक , रोजगार, चक्रवात/प्राकृतिक आपदा या अन्य तरह से महामारी से प्रभावित हैं । और इस सबका अंत तक सुनिश्चित नहीं है । ऐसी भयावहता में केवल सकारात्मक होना ही हमें बचा सकता है । रात के बाद सुबह जरूर होगी पर तब तक धैर्य और जीवन बचाये रखना होगा । यह तभी सम्भव है जब समाज समवेत प्रयास करे । व्यक्ति अपनी रचनात्मक वृत्तियों को एकाकार करे । जिस तरह पायल से...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ कोरोना आपदा के क्षण (लॉकडाउन, क्वारंटाइन और आइसोलेशन) ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ कोरोना आपदा के क्षण (लॉकडाउन, क्वारंटाइन और आइसोलेशन) ☆ हेमन्त बावनकर प्रिय मित्रो, आज हम सब जीवन के एक अत्यंत कठिन दौर से गुज़र रहे हैं। एक ऐसा कालखंड जिसकी किसी ने कभी कल्पना तक नहीं की थी। ई-अभिव्यक्ति परिवार भी इस आपदा से सुरक्षित नहीं रह पाया। हमारे कई सम्माननीय लेखक और पाठक भी इस आपदा से ग्रसित हुए एवं अधिकतर ईश्वर की अनुकंपा से एवं आपके अपार स्नेह और दुआओं से इस आपदा से सुरक्षित निकल आए। इस दौर से मैं स्वयं एवं श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी (संपादक - ई-अभिव्यक्ति (हिन्दी) अभी हाल ही में स्वस्थ होकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।  यह ईश्वर की अनुकंपा एवं आप सब का अपार स्नेह ही है जो हम आप की सेवा में पुनः उपस्थित हो सके।  हमें पूर्ण विश्वास है कि हम शनैः शनैः पुनः उसी ऊर्जा के साथ स्वस्थ एवं सकारात्मक साहित्य सेवा में अपना योगदान अविरत जारी रख सकेंगे। आज हम किसी वैज्ञानिक फंतासी में जीवाणु युद्ध...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆ पिता का होना या न होना ! ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–52 ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆ पिता का होना या न होना ! ☆ प्रिय मित्रो, किसी भी रिश्ते का एहसास उसके होने से अधिक उसके खोने पर होता है। अनायास ही मन में विचार आया कि – साहित्य, सिनेमा और रिश्तों में ‘पिता’ को वह स्थान क्यों नहीं मिल पाया जो ‘माँ’ को मिला है? आखिर इसका उत्तर भी तो आप के ही पास है और आपकी संवेदनशीलता के माध्यम से मुझे उस उत्तर को सबसे साझा भी करना है। जरा कल्पना कीजिये कैसा लगता होगा? जब किसी को समाचार मिलता है कि वह ‘पिता’ बन गया, ‘पिता’ नहीं बन सकता, बेटे का पिता बन गया, बेटी का पिता बन गया, दिव्याङ्ग का पिता बन गया, थर्ड जेंडर का पिता बन गया। फिर बतौर संतान इसका विपरीत पहलू भी हो सकता है। कैसा लगा है जब हम सुनते हैं - संतान ने पिता खो दिया या पिता ने संतान खो दिया।  यदि ‘पिता’ शब्द का संवेदनाओं से गणितीय आकलन करें तो उससे संबन्धित...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं ☆ श्री जयप्रकाश पाण्डेय/श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव – संपादक द्वय (हिन्दी) ☆

ई-अभिव्यक्ति -संवाद प्रिय मित्रो, कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों... दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ हमें हमारे जीवन और कर्म को नई दिशा प्रदान करती है। यह ई-अभिव्यक्ति परिवार ( ई- अभिव्यक्ति - हिन्दी/मराठी/अंग्रेजी) के परिश्रम  एवं आपके भरपूर प्रतिसाद तथा स्नेह का फल है जो इन पंक्तियों के लिखे जाने तक आपकी अपनी वेबसाइट पर 3,50,500+ विजिटर्स अब तक विजिट कर चुके हैं। ( ई-अभिव्यक्ति (हिन्दी) संपादक मण्डल के संपादक-द्वय मित्रों  श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी एवं श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव 'विनम्र' जी के सम्पादकीय उद्बोधन) श्री जय प्रकाश पाण्डेय (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी   की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में  सँजो रखा...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति के 2रे जन्मदिवस – सफर तीन लाख का और विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें ☆

☆ ई-अभिव्यक्ति के 2रे जन्मदिवस - सफर तीन लाख का और विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें ☆ प्रिय मित्रो, अक्टूबर माह और आज का दिन ई- अभिव्यक्ति परिवार के लिए कई अर्थों में महत्वपूर्ण है।  इसी माह 15 अक्टूबर 2018 को हमने अपनी यात्रा प्रारम्भ की थी। मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि 2 वर्ष 10 दिनों के इस छोटे से सफर में आपकी अपनी वेबसाइट पर 3 लाख से अधिक विजिटर्स विजिट कर चुके हैं। आज मैं अपने नहीं आपके ही विचार आपसे साझा करने का प्रयास कर रहा हूँ। जगत सिंह बिष्ट प्रिय भाई हेमन्त जी, सर्वप्रथम, ई-अभिव्यक्ति पर 3,00,000 विजिटर्स के कीर्तिमान हेतु हार्दिक बधाई। निश्चित रूप से, किसी भी पैमाने पर, 2 वर्ष के कम समय में यह एक मील का पत्थर है। यह मेरा परम सौभाग्य है कि इस यात्रा की परिकल्पना के समय से ही मुझे इसका एक महत्वपूर्ण सहयात्री और क्षण-क्षण का प्रत्यक्षदर्शी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। सच कहूँ तो मुझे यह यात्रा...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆ प्रेरणास्रोत श्रीमती उज्ज्वला केळकर जी के 78 वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें ☆

ई-अभिव्यक्ति -संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆प्रेरणास्रोत श्रीमती उज्ज्वला केळकर जी के 78वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें  ☆ प्रिय मित्रो, सुप्रसिद्ध वरिष्ठ मराठी साहित्यकार श्रीमति उज्ज्वला केळकर जी मराठी साहित्य की विभिन्न विधाओं की सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपके कई साहित्य का हिन्दी अनुवाद भी हुआ है। इसके अतिरिक्त आपने काफी हिंदी साहित्य का मराठी अनुवाद भी किया है। आप कई पुरस्कारों/अलंकारणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपकी अब तक 60 सेअधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें बाल वाङ्गमय -30 से अधिक, कथा संग्रह – 4, कविता संग्रह-2, संकीर्ण -2 ( मराठी )। इनके अतिरिक्त हिंदी से अनुवादित कथा संग्रह – 16, उपन्यास – 6, लघुकथा संग्रह – 6, तत्वज्ञान पर – 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल ही में आपकी दो पुस्तकें और प्रकाशित हुई हैं जिनकी जानकारी हम शीघ्र ही आपसे साझा करेंगे। जीवन के इस पड़ाव में भी आपका सीधा सादा सरल एवं मृदु स्वभाव, सक्रिय एवं स्वस्थ जीवन तथा साहित्य के प्रति समर्पण हमें सदैव प्रेरणा देता है। आपने ई-अभिव्यक्ति के मराठी...
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ई-अभिव्यक्ति – संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति का आज का अंक अग्रज एवं वरिष्ठ मराठी साहित्यकार स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे जी को समर्पित ☆ हेमन्त बावनकर

स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे   अश्रुपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि     ☆ ई- अभिव्यक्ति का आज का अंक अग्रज एवं वरिष्ठ मराठी साहित्यकार स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे जी को समर्पित ☆ (विदर्भ क्षेत्र से सुप्रसिद्ध वरिष्ठ मराठी साहित्यकार एवं अग्रज  स्व प्रभाकर महादेवराव धोपटे जी का कल दिनांक 20 अगस्त 2020 को प्रातः साढ़े सात बजे हृदय विकार के कारण चंद्रपुर में आकस्मिक निधन हो गया। आपका निधन हम सबके लिए एक अपूरणीय क्षति है। हमने एक विनोदी स्वभाव के मिलनसार एवं सेवाभावी अग्रज साहित्यकार को खो दिया। संयोगवश विगत मार्च में लॉक डाउन पूर्व एक पारिवारिक कार्यक्रम में नागपुर में आपसे मिला था, जो मेरे लिए अविस्मरणीय है।   हमारे सम्माननीय पाठक ई-अभिव्यक्ति केअंतरराष्ट्रीय पटल पर आपके साप्ताहिक स्तम्भ – स्वप्नपाकळ्या को  कभी विस्मृत नहीं कर सकते । आप मराठी साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर थे। वेस्टर्न  कोलफ़ील्ड्स लिमिटेड, चंद्रपुर क्षेत्र से सेवानिवृत्त अधिकारी  थे ।  अब तक आपकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें दो काव्य संग्रह एवं एक आलेख संग्रह (अनुभव कथन) प्रकाशित हो चुके हैं।...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 51 ☆ ई- अभिव्यक्ति मित्र संपादक मंडल का स्वागत ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–51 ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 51 ☆ ई- अभिव्यक्ति का परिवर्तित स्वरुप - मित्र संपादक मंडल का स्वागत ☆ प्रिय मित्रो, सर्वप्रथम  स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी जी को विनम्र श्रद्धांजलि। आप से विनम्र अनुरोध है कि कृपया निम्न लिंक पर जाकर श्रद्धांजलि स्वरुप मेरी कविता अवश्य पढ़ें। ☆ गीत नया गाता था, अब गीत नहीं गाऊँगा ☆ इन दो वर्षों  से भी कम समय में प्राप्त आप सबके स्नेह एवं प्रतिसाद से मैं पुनः अभिभूत हूँ और इन पंक्तियों को पुनः लिखना मेरे जीवन के अत्यंत भावुक क्षणों में से एक है। विभिन्न उपलब्धियों ने मुझे असीमित ऊर्जा प्रदान की एवं एक जिम्मेदारी का अहसास भी कि आपको और अधिक स्तरीय सकारात्मक साहित्य दे सकूं। ईश्वर ने ई-अभिव्यक्ति संवाद के माध्यम से मुझे आप सबसे जुड़ने के ऐसे कई अवसर प्रदान किये हैं जिसके लिए मैं उनका सदैव कृतज्ञ हूँ । इन पंक्तियों के लिखे जाने तक आपकी अपनी वेबसाइट को  2 वर्ष से भी कम समय में 2,53,500+ विजिटर्स मिल सकेंगे इसकी मैंने कभी कल्पना...
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हिन्दी साहित्य – ई-अभिव्यक्ति संवाद ☆ अतिथि संपादक की कलम से ……. अब तक 365 !….✍️ ☆ – श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  मैं अत्यंत कृतज्ञ हूँ सम्माननीय श्री संजय भरद्वाज जी का जिन्होंने जाने अनजाने में मेरे ह्रदय में ज्ञान एवं अध्यात्म को ज्योति को प्रज्ज्वलित किया। मैंने सन्देश दिया था कि ई- अभिव्यक्ति के अंक का प्रकाशन अगले 7 दिनों तक व्यक्तिगत एवं तकनीकी कारणों से स्थगित रहेगा किन्तु, श्री संजय भारद्वाज जी की एक आत्मीय पोस्ट ने मेरे अंतर्मन को झकझोर दिया...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 50 ☆ ई- अभिव्यक्ति का आज का अंक अनुजवत मित्र स्वर्गीय आनंद लोचन दुबे जी को समर्पित ☆☆ हेमन्त बावनकर

प्रिय आनंद    अश्रुपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि     ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 50 ☆ ई- अभिव्यक्ति का आज का अंक अनुजवत मित्र स्वर्गीय आनंद लोचन दुबे जी को समर्पित ☆ प्रिय मित्रों,  वैसे तो इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति एक विशिष्टता लेकर आता है और चुपचाप चला जाता है। फिर छोड़ जाता है वे स्मृतियाँ जो जीवन भर हमारे साथ चलती हैं। लगता है कि काश कुछ दिन और साथ चल सकता । किन्तु विधि का विधान तो है ही सबके लिए सामान, कोई कुछ पहले जायेगा कोई कुछ समय बाद। किन्तु, आनंद तुमसे यह उम्मीद नहीं थी कि इतने जल्दी साथ छोड़ दोगे। अभी 19 मई को ही तो तुमसे लम्बी बात हुई थी जिसे मैं अब भी टेप की तरह रिवाइंड कर सुन सकता हूँ। और आज दुखद समाचार मिला कि 20 मई 2020 की रात हृदयाघात से तुम चल बसे। प्रिय मित्रों, आप जानना नहीं चाहेंगे यह शख्सियत कौन है ? आपके लिए मित्र आनंद, भारतीय स्टेट बैंक, सिमरिया, कटनी शाखा का शाखा प्रबंधक था।...
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