image_print

ई-अभिव्यक्ति – संवाद ☆ 25 सप्टेंबर – संपादकीय ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

 ☆ 25 सप्टेंबर- संपादकीय ☆   स्व बाळकृष्ण हरी  कोल्हटकर  25 सप्टेंबर – मराठीतील सुप्रसिद्ध नाटककार बाळ कोल्हटकर (बाळकृष्ण हरी  कोल्हटकर) यांचा आज जन्मदिन (जन्मदिनांक 25 सप्टेंबर 1926).  ते उत्तम नाटककार होते. दिग्दर्शक, अभिनेते होते आणि उत्तम कवीही होते. अनेक नाटकात त्यांची स्वत:ची पदे आहेत. त्यांची नाटके कौटुंबिक आणि भावनाप्रधान आहेत.  वाहतो ही दुर्वांची जुडी, दुरितांचे तिमिर जावो, देव दीनाघरी धावला, वेगळं व्हायचय मला इ.त्यांची गाजलेली नाटके. त्यांनी 30 हून अधिक नाटके लिहिली. त्यांच्या  दुरितांचे तिमिर जावो या अतिशय प्रसिद्ध नाटकामधील एक गीत---- ☆ तू जपून टाक पाऊल जरा ☆ जीवन सुख-दु:खाची जाळी त्यास लटकले मानव कोळी एकाने दुसर्‍यास गिळावे हाच जगाचा न्याय खरा हीच जगाची परंपरा  तू जपून टाक पाऊल जरा-- जीवनातल्या मुशाफिरा ।।   पापपुण्य जे करशील जगती  चित्रगुप्त मागेल पावती पापाइतुके माप ओतुनी  जे केले ते तसे भरा. ।।   निरोप जेव्हा येईल वरचा तेव्हा होशील सर्वांघरचा   तोवर तू या रिपू जगाचा चुकवून मुख दे तोंड जरा।।   दानव जगती मानव झाला  देवाचाही दगड बनविला  कोण कोठला  तू तर पामर चुकून तुझा करतील चुरा ।।   तू जपून टाक पाऊल जरा -----   प्रस्तुती – उज्ज्वला केळकर, सम्पादिका  - ई – अभिव्यक्ती (मराठी) चित्र साभार - कोल्हटकर,...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ मनोगत – यह ई-अभिव्यक्ति परिवार……☆ श्री सूरज कुमार सिंह

श्री सूरज कुमार सिंह  ई-अभिव्यक्ति संवाद में प्रतिभाशाली युवा लेखक श्री सूरज कुमार सिंह जी से प्राप्त उनकी मनोभावनाओं को काव्य स्वरुप में पाकर आज मैं निःशब्द हूँ। इस अपार स्नेह  को पाकर मैं अत्यंत भावुक हो गया हूँ, मेरे नेत्र नम हैं और उनके उद्गारों को उसी स्वरुप में आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। आप सब का स्नेह ही मेरी अमूल्य पूँजी है जो मुझे कठिन समय में भी पुनः उठ कर चलने के लिए प्रेरित करती है। मैं अत्यंत भाग्यशाली हूँ  कि मुझे ई-अभिव्यक्ति के सम्माननीय वरिष्ठ सदस्यों का आशीर्वाद एवं  सभी सदस्यों का स्नेह प्राप्त हो रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आप सब का स्नेह ऐसे ही मिलता रहे एवं माँ सरस्वती की कृपा बनी रहे।  💐 ई-अभिव्यक्ति परिवार के सभी सदस्यों का ह्रदय से आभार💐     - हेमन्त बावनकर     मनोगत - यह ई-अभिव्यक्ति परिवार...... ऐसे हैं हमारे हेमंत सर साहित्य ही जीवन है जिनका जिनके लेखन मे करुणा अपार है शब्द मात्र पर्याप्त नही इन सज्जन की...
Read More

मराठी साहित्य – ई-अभिव्यक्ति संवाद ☆ मनोगत – ई-अभिव्यक्तीचे दुसऱ्या वर्षात पदार्पण ☆ सौ. सुनिता गद्रे

सौ. सुनिता गद्रे  ☆ मनोगत - ई-अभिव्यक्तीचे दुसऱ्या वर्षात पदार्पण ☆ सौ. सुनिता गद्रे ☆  💐💐 हार्दिक आभार 💐💐 ≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे ≈...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) का प्रथम वर्ष सम्पन्न ☆ 15 अगस्त 2021 से ई-अभिव्यक्ति का पुनर्प्रकाशन ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) का प्रथम वर्ष सम्पन्न ☆ 15 अगस्त 2021 से ई-अभिव्यक्ति का पुनर्प्रकाशन ☆ प्रिय मित्रों, सादर अभिवादन,  ई-अभिव्यक्ति (मराठी) के प्रथम वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में समस्त स्नेही सुहृदय मराठी लेखकगण एवं पाठकगण का हृदयतल से आभार। यह एक सुखद आश्चर्य है कि ई-अभिव्यक्ति वेबसाइट पर मेरी अनुपस्थिति के बावजूद संपादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ने अपनी प्रिय ई-पत्रिका को ई-अभिव्यक्ती:मराठी व्हाट्स एप्प ग्रुप के माध्यम से स्तरीय रचनाओं का प्रकाशन सतत जारी रखा। इस अभूतपूर्व सहयोग एवं समर्पण की भावना के लिए मैं आदरणीया श्रीमती उज्ज्वला केळकर, श्री सुहास रघुनाथ पंडित जी एवं  सौ. मंजुषा मुळे जी का हृदय से आभारी हूँ।  यह शाश्वत सत्य है कि "होइहि सोइ जो राम रचि राखा"। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कुछ कठिन पल आते हैं, जो ईश्वर पर विश्वास, वरिष्ठ जनों के आशीर्वाद एवं स्नेही जनों कि शुभकामनाओं से चले भी जाते हैं। हम पुनः सुखद पलों में जीने लगते हैं।  कुछ माह पूर्व ही मैंने एवं श्री जय...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ सनम्र निवेदन ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ सनम्र निवेदन ☆ प्रिय मित्रों, सादर अभिवादन, ईश्वर की कृपा एवम आप सब के आत्मीय स्नेह से कोरोना से पार पा सका। मेरे एवं आपके दैनिक जीवन के अभिन्न अंग ई-अभिव्यक्ति ने पुनः गति पकड़ी ही थी कि कुछ विकट स्वास्थ्य समस्याओं ने पुनः जकड़ लिया। "होइहि सोइ जो राम रचि राखा" मुझे ईश्वर पर पूरा विश्वास है कि मैं शीघ्र ही स्वस्थ होकर पुनः ई-अभिव्यक्ति को नवीन तकनीकी स्वरूप में आपके समक्ष प्रस्तुत कर सकूँगा। साथ ही आपकी रचनाओं को ससम्मान वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकूंगा। आपके आशीर्वाद एवं स्नेह की अपेक्षा सहित 🙏🏻🙏🏻 हेमन्त बावनकर 22 जून 2021...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ निवेदन ☆ श्रीमती उज्ज्वला केळकर

श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ निवेदन ☆ श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆ आपल्या ई-अभिव्यक्तीचे प्रमुख संपादक मा. श्री. हेमंत बावनकर यांनी आपल्या सर्वांसाठी पाठवलेला संदेश ---- सर्व सुह्रदांना नमस्कार, ईश्वराची कृपा आणि आपल्या सर्वांचा मनापासूनचा स्नेह यामुळे मी करोनाच्या विळख्यातून सुखरूप बाहेर येऊ शकलो माझ्या आणि आपणा सर्वांच्याच दैनंदिन जीवनाचा अविभाज्य भाग झालेल्या ई-अभिव्यक्तीचे कामही पुन्हा नव्या जोमाने करायला लागलो होतो. इतक्यात प्रकृतीच्या काही कठीण समस्यांनी मला पुन्हा घेरले. म्हणतात ना-                                                            "होइहि सोइ जो राम रचि राखा" --- हेच खरं. पण परमेश्वरावर माझा पूर्ण विश्वास आहे, आणि लवकरच मी पूर्ण बरा होऊन ई- अभिव्यक्तीला नव्या तांत्रिक स्वरूपात आपल्यासमोर प्रस्तुत करू शकेन. त्याचबरोबर आपणा सर्वांचे लिखाण वेबसाईटवर सन्मानाने प्रकाशित करू शकेन . आपल्या सर्वांच्या आशीर्वादाची आणि स्नेहाची अपेक्षा करत आहे. 🙏🏻🙏🏻 हेमंत बावनकर ई-अभिव्यक्ती मराठी विभागाचे सर्व संपादक आपल्या सर्वांच्या वतीने ईश्वर चरणी प्रार्थना करतो की श्री. बावनकर सरांना...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ आज समवेत प्रयासों की सकारात्मकता जरूरी है ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद   ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ आज समवेत प्रयासों की सकारात्मकता जरूरी है ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆ प्रिय मित्रो, यह सदियों में होने वाला अत्यंत दुष्कर समय है । जहाँ हम पड़ोस की किसी एक अकाल मृत्यु से विचलित हो जाते थे उसी देश मे अब तक सवा तीन लाख मृत्यु कोरोना से हो चुकीं हैं , यदि अब दुनिया को ग्लोबल विलेज मानते हैं तो आंकड़े गम्भीर हैं । और यह तो केवल मृत्यु के आंकड़े हैं । कितने ही लोग बुरी तरह से स्वास्थ्य , आर्थिक , रोजगार, चक्रवात/प्राकृतिक आपदा या अन्य तरह से महामारी से प्रभावित हैं । और इस सबका अंत तक सुनिश्चित नहीं है । ऐसी भयावहता में केवल सकारात्मक होना ही हमें बचा सकता है । रात के बाद सुबह जरूर होगी पर तब तक धैर्य और जीवन बचाये रखना होगा । यह तभी सम्भव है जब समाज समवेत प्रयास करे । व्यक्ति अपनी रचनात्मक वृत्तियों को एकाकार करे । जिस तरह पायल से...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ कोरोना आपदा के क्षण (लॉकडाउन, क्वारंटाइन और आइसोलेशन) ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ कोरोना आपदा के क्षण (लॉकडाउन, क्वारंटाइन और आइसोलेशन) ☆ हेमन्त बावनकर प्रिय मित्रो, आज हम सब जीवन के एक अत्यंत कठिन दौर से गुज़र रहे हैं। एक ऐसा कालखंड जिसकी किसी ने कभी कल्पना तक नहीं की थी। ई-अभिव्यक्ति परिवार भी इस आपदा से सुरक्षित नहीं रह पाया। हमारे कई सम्माननीय लेखक और पाठक भी इस आपदा से ग्रसित हुए एवं अधिकतर ईश्वर की अनुकंपा से एवं आपके अपार स्नेह और दुआओं से इस आपदा से सुरक्षित निकल आए। इस दौर से मैं स्वयं एवं श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी (संपादक - ई-अभिव्यक्ति (हिन्दी) अभी हाल ही में स्वस्थ होकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।  यह ईश्वर की अनुकंपा एवं आप सब का अपार स्नेह ही है जो हम आप की सेवा में पुनः उपस्थित हो सके।  हमें पूर्ण विश्वास है कि हम शनैः शनैः पुनः उसी ऊर्जा के साथ स्वस्थ एवं सकारात्मक साहित्य सेवा में अपना योगदान अविरत जारी रख सकेंगे। आज हम किसी वैज्ञानिक फंतासी में जीवाणु युद्ध...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆ पिता का होना या न होना ! ☆ हेमन्त बावनकर

ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–52 ☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆ पिता का होना या न होना ! ☆ प्रिय मित्रो, किसी भी रिश्ते का एहसास उसके होने से अधिक उसके खोने पर होता है। अनायास ही मन में विचार आया कि – साहित्य, सिनेमा और रिश्तों में ‘पिता’ को वह स्थान क्यों नहीं मिल पाया जो ‘माँ’ को मिला है? आखिर इसका उत्तर भी तो आप के ही पास है और आपकी संवेदनशीलता के माध्यम से मुझे उस उत्तर को सबसे साझा भी करना है। जरा कल्पना कीजिये कैसा लगता होगा? जब किसी को समाचार मिलता है कि वह ‘पिता’ बन गया, ‘पिता’ नहीं बन सकता, बेटे का पिता बन गया, बेटी का पिता बन गया, दिव्याङ्ग का पिता बन गया, थर्ड जेंडर का पिता बन गया। फिर बतौर संतान इसका विपरीत पहलू भी हो सकता है। कैसा लगा है जब हम सुनते हैं - संतान ने पिता खो दिया या पिता ने संतान खो दिया।  यदि ‘पिता’ शब्द का संवेदनाओं से गणितीय आकलन करें तो उससे संबन्धित...
Read More

ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं ☆ श्री जयप्रकाश पाण्डेय/श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव – संपादक द्वय (हिन्दी) ☆

ई-अभिव्यक्ति -संवाद प्रिय मित्रो, कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों... दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ हमें हमारे जीवन और कर्म को नई दिशा प्रदान करती है। यह ई-अभिव्यक्ति परिवार ( ई- अभिव्यक्ति - हिन्दी/मराठी/अंग्रेजी) के परिश्रम  एवं आपके भरपूर प्रतिसाद तथा स्नेह का फल है जो इन पंक्तियों के लिखे जाने तक आपकी अपनी वेबसाइट पर 3,50,500+ विजिटर्स अब तक विजिट कर चुके हैं। ( ई-अभिव्यक्ति (हिन्दी) संपादक मण्डल के संपादक-द्वय मित्रों  श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी एवं श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव 'विनम्र' जी के सम्पादकीय उद्बोधन) श्री जय प्रकाश पाण्डेय (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी   की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में  सँजो रखा...
Read More
image_print