श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का हिन्दी बाल -साहित्य एवं हिन्दी साहित्य की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचना सहित 145 बालकहानियाँ 8 भाषाओं में 1160 अंकों में प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकेँ-1- रोचक विज्ञान कथाएँ, 2-संयम की जीत, 3- कुएं को बुखार, 4- कसक, 5- हाइकु संयुक्ता, 6- चाबी वाला भूत, 7- बच्चों! सुनो कहानी, इन्द्रधनुष (बालकहानी माला-7) सहित 4 मराठी पुस्तकें प्रकाशित। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का श्री हरिकृष्ण देवसरे बाल साहित्य पुरस्कार-2018 ₹51000 सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य” के अंतर्गत साहित्य आप प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है डॉ. अमित जैन जी द्वारा संपादित “चाणक्य वार्ता (पाक्षिक)” की समीक्षा।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य # २३६ ☆
☆ पुस्तक समीक्षा – चाणक्य वार्ता (पाक्षिक) – सम्पादक: डॉ. अमित जैन ☆ समीक्षक – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
पत्रिका: चाणक्य वार्ता (पाक्षिक)
अंक: 1-15 जनवरी, 2026 (बाल साहित्य विशेषांक)
सम्पादक: डॉ. अमित जैन
पृष्ठ: 152 | मूल्य: 150 रुपये
समीक्षक: ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश‘
☆ नई पीढ़ी के नैतिक और बौद्धिक विकास का सारथी — ‘बाल साहित्य विशेषांक’ – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
आज के तकनीकी युग में, जहाँ वीडियो गेम और सोशल मीडिया बच्चों के कोमल मन को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं, बाल साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में ‘चाणक्य वार्ता’ पत्रिका का ‘बाल साहित्य विशेषांक’ (जनवरी 2026) एक मशाल की तरह सामने आया है। 152 पृष्ठों का यह विशाल कलेवर न केवल संख्यात्मक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी यह बाल साहित्य के प्रति सम्पादकीय टीम की निष्ठा को दर्शाता है।
संपादकीय दृष्टि और विरासत का सम्मान
विशेषांक की शुरुआत संपादक डॉ. अमित जैन के सारगर्भित संपादकीय से होती है, जो वर्तमान समय में बाल साहित्य की प्रासंगिकता पर बल देता है। पत्रिका ने अपनी परंपरा को भूलने नहीं दिया है। ‘विरासत’ स्तंभ के अंतर्गत महान बाल साहित्यकारों— चंद्रपाल सिंह यादव ‘मयंक’, डॉ. अश्वघोष, डॉ. श्याम सिंह शशि और डॉ. राष्ट्रबंधु के योगदान को रेखांकित करना सराहनीय है। यह खंड नई पीढ़ी के लेखकों को अपने दिग्गजों से परिचित कराने का एक सेतु है।
कहानियों और नाटकों का इंद्रधनुष
पत्रिका में संकलित कहानियाँ मनोरंजन के साथ-साथ सूक्ष्म उपदेशात्मकता लिए हुए हैं। प्रकाश मनु की रचना जहाँ कौतूहल पैदा करती है, वहीं डॉ. रमेश यादव की ‘दादा-दादी पार्क’ पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की अहमियत समझाती है। नाटकों का समावेश इस अंक की एक बड़ी उपलब्धि है। अलका प्रमोद और बलराम अग्रवाल के नाटक न केवल पढ़ने के लिए हैं, बल्कि स्कूलों में मंचन के लिए भी बेहद उपयुक्त हैं। ये नाटक बच्चों में संवाद कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
काव्य और अन्य विधाओं का सौंदर्य
विशेषांक में कविताओं का चयन बहुत ही सलीके से किया गया है। लक्ष्मीनारायण भाला, सूर्य कुमार पांडे, संजीव जायसवाल ‘संजय’ और शकुंतला कालरा जैसे वरिष्ठ कवियों की रचनाओं में जहाँ गेयता और लय है, वहीं समकालीन विषयों पर लिखी गई कविताएँ बच्चों की जिज्ञासाओं को शांत करती हैं। पहेलियाँ, चित्रकथाएँ और बाल-गीत पत्रिका को मनोरंजक बनाते हैं, जिससे बच्चों की रुचि अंत तक बनी रहती है।
वैश्विक संदर्भ और विमर्श
इस विशेषांक की सबसे अनूठी विशेषता इसका ‘अंतरराष्ट्रीय’ स्वरूप है। ‘प्रवासी पन्ने’ में अमेरिका से डॉ. अनूप भार्गव, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. शैलजा चतुर्वेदी और लंदन से दिव्या माथुर जैसे रचनाकारों की उपस्थिति यह बताती है कि सात समंदर पार भी भारतीय संस्कृति और हिंदी बाल साहित्य की खुशबू महक रही है। इसके अतिरिक्त, प्रो. उषा यादव और प्रो. सुरेन्द्र विक्रम के आलेख बाल साहित्य के गिरते स्तर और समीक्षा की कमी जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक बहस छेड़ते हैं।
प्रस्तुति और साज-सज्जा
पत्रिका का आवरण चित्र अत्यंत आकर्षक है, जो देखते ही बच्चों को अपनी ओर खींचता है। कागज़ की गुणवत्ता और छपाई साफ-सुथरी है। चित्रों का प्रयोग कहानियों के भाव के अनुरूप किया गया है, जिससे पठन-पाठन की प्रक्रिया उबाऊ नहीं लगती।
निष्कर्ष
‘चाणक्य वार्ता’ का यह ‘बाल साहित्य विशेषांक’ केवल एक पत्रिका का अंक मात्र नहीं है, बल्कि यह हिंदी बाल साहित्य के वर्तमान परिदृश्य का एक प्रामाणिक दस्तावेज है। इसमें जहाँ एक ओर परंपरा का सम्मान है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की आधुनिक सोच भी है। 150 रुपये के मूल्य में यह विशेषांक हर पुस्तकालय और हर उस घर की शोभा बनना चाहिए जहाँ बच्चे पल रहे हैं।
यह अंक निश्चित रूप से बाल साहित्य की दुनिया में एक नए मील के पत्थर के रूप में याद किया जाएगा।
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© श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
12/01/2025
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

























