image_print

हिन्दी साहित्य – यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #77 – 15 – जिम उर्फ़ जेम्स एडवर्ड कार्बेट ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है. पर्यटन आपकी एक अभिरुचि है। इस सन्दर्भ में श्री अरुण डनायक जी हमारे  प्रबुद्ध पाठकों से अपनी कुमायूं यात्रा के संस्मरण साझा कर रहे हैं। आज प्रस्तुत है  “कुमायूं  – 15 – जिम उर्फ़ जेम्स एडवर्ड कार्बेट”) ☆ यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #77 – 15 – जिम उर्फ़ जेम्स एडवर्ड कार्बेट☆  भारत लम्बे समय तक ब्रिटिश...
Read More

मराठी साहित्य – मीप्रवासीनी ☆ मी प्रवासिनी क्रमांक-९ – जगदलपूर ☆ सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी

सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी  मीप्रवासीनी  ☆ मी प्रवासिनी  क्रमांक- ९ – जगदलपूर ☆ सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी ☆  बोरा केव्हज् पाहून आम्ही बसने आरकू व्हॅली इथे मुक्कामासाठी निघालो. खरं म्हणजे विशाखापट्टणम ते छत्तीसगडमधील जगदलपूर हा आमचा प्रवास किरंडूल एक्स्प्रेसने  होणार होता. ही किरंडूल एक्सप्रेस पूर्व घाटाच्या श्रीमंत पर्वतराजीतून, घनदाट जंगलातून, ५४ बोगद्यांमधून  प्रवास करीत जाते म्हणून त्या प्रवासाचे अप्रूप वाटत होते. पण नुकत्याच पडलेल्या धुवांधार पावसामुळे एका बोगद्याच्या तोंडावर डोंगरातली मोठी शिळा गडगडत येऊन मार्ग अडवून बसली होती. म्हणून हा प्रवास आम्हाला या डोंगर-दर्‍या शेजारून काढलेल्या रस्त्याने करावा लागला. हा प्रवासही आनंददायी होता. रूळांवरील अडथळे दूर सारून नुकत्याच सुरू झालेल्या मालगाडीचे दर्शन अधूनमधून या बस प्रवासात होत होते. प्रवासी गाडी मात्र अजून सुरू झाली नव्हती. अनंतगिरी पर्वतरांगातील लावण्याच्या रेशमी छटा डोळ्यांना सुखवीत होत्या.भाताची पोपटी, सोनसळी शेते, तिळाच्या पिवळ्याधमक नाजूक फुलांची शेती आणि मोहरीच्या शेतातील हळदी रंगाचा झुलणारा गालिचा, कॉफीच्या काळपट हिरव्या पानांचे मळे आणि डोंगर कपारीतून उड्या घेत धावणारे शुभ्र तुषारांचे जलप्रपात रंगाची उधळण करीत होते. गाई, म्हशी, शेळ्या, मेंढ्या यांचे कळप चरायला नेणारे...
Read More

हिन्दी साहित्य – यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #75 – 14 – उत्तराखंड के व्यंजन ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है. पर्यटन आपकी एक अभिरुचि है। इस सन्दर्भ में श्री अरुण डनायक जी हमारे  प्रबुद्ध पाठकों से अपनी कुमायूं यात्रा के संस्मरण साझा कर रहे हैं। आज प्रस्तुत है  “कुमायूं  – 14 – उत्तराखंड के व्यंजन ”) ☆ यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #76 – 14 – उत्तराखंड के व्यंजन ☆  भारत की विविधता में भोजन की विविधताओं...
Read More

मराठी साहित्य – मीप्रवासीनी ☆ मी प्रवासिनी क्रमांक-८ – सिंहगिरीचे शिल्प काव्य ☆ सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी

सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी  मीप्रवासीनी  ☆ मी प्रवासिनी  क्रमांक- ८ – सिंहगिरीचे शिल्प काव्य ☆ सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी ☆  विशाखापट्टणम हे भारताच्या पूर्व किनाऱ्यावरील महत्त्वाचे बंदर आहे. या नैसर्गिक बंदरातून दररोज लक्षावधी टन मालाची आयात- निर्यात होते. जहाज बांधणीचा अवाढव्य कारखाना इथे आहे. विशाखापट्टणम हे ईस्टर्न नेव्हल कमांडचे मुख्यालय  आहे. आम्ही इथल्या ऋषिकोंडा बीचवरील आंध्रप्रदेश टुरिझमच्या 'पुन्नामी बीच रिसॉर्ट' मध्ये राहिलो होतो. ऋषिकोंडा बीच ते भिमुलीपटनम असा  हा सलग बत्तीस किलोमीटर लांबीचा अर्धचंद्राकृती स्वच्छ समुद्र किनारा आहे. निळ्या हिरव्या उसळणाऱ्या लाटा गळ्यात पांढर्‍याशुभ्र फेसाचा मफलर घालून किनाऱ्यावरील सोनेरी वाळूकडे झेपावत होत्या. किनाऱ्यावरील हिरवळीने नटलेल्या, फुलांनी बहरलेल्या बागेत नेव्हल कमांडच्या बॅण्डचे सूर तरंगत होते. समुद्र किनार्‍यावरच पाणबुडीतले आगळे संग्रहालय बघायला मिळाले.' आय एन एस कुरसुरा' ही रशियन बनावटीची पाणबुडी १९७२ च्या पाकिस्तानी युद्धात कामगिरीवर होती. ९० मीटर लांब आणि ४ मीटर रुंद असलेल्या या पाणबुडीचे आता संग्रहालय केले आहे. आतल्या एवढ्याश्या जागेत पाणबुडीच्या सगळ्या भिंती निरनिराळे पाईप्स, केबल्स यांनी व्यापून गेल्या होत्या. छोट्या-छोट्या केबिन्समध्ये दोघांची झोपायची सोय होती. कॅप्टनची केबीन, स्वयंपाकघर, स्वच्छतागृह सारे सुसज्ज...
Read More

हिन्दी साहित्य – यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #75 – 13 – जिम कार्बेट से भोपाल ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है. पर्यटन आपकी एक अभिरुचि है। इस सन्दर्भ में श्री अरुण डनायक जी हमारे  प्रबुद्ध पाठकों से अपनी कुमायूं यात्रा के संस्मरण साझा कर रहे हैं। आज प्रस्तुत है  “कुमायूं  – 13 – जिम कार्बेट से भोपाल ”) ☆ यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #76 – 13 – जिम कार्बेट से भोपाल ☆  जिस दिन हमें जिम कार्बेट...
Read More

मराठी साहित्य – मीप्रवासीनी ☆ मी प्रवासिनी क्रमांक-७ – क्रोएशियाचे समुद्र संगीत ☆ सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी

सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी  मीप्रवासीनी  ☆ मी प्रवासिनी  क्रमांक- ७ – क्रोएशियाचे समुद्र संगीत ☆ सौ. पुष्पा चिंतामण जोशी ☆  क्रोएशियाला  एड्रियाटिक सागराचा ११०० मैल समुद्र किनारा लाभला आहे. दुब्रावनिक या दक्षिणेकडील समुद्रकिनाऱ्यावरील शहरात पोहोचताना उजवीकडे सतत निळाशार समुद्र दिसत होता. त्यात अनेक हिरवीगार बेटे होती. क्रोएशियाच्या हद्दीत लहान-मोठी हजारांपेक्षा जास्त बेटे आहेत. त्यातील फार थोड्या बेटांवर मनुष्यवस्ती आहे. काही बेटांवरील फिकट पिवळ्या रंगाची, गडद लाल रंगाच्या कौलांची टुमदार घरे चित्रातल्यासारखी दिसत होती. समुद्रात छोट्या कयाकपासून प्रचंड मोठ्या मालवाहू बोटी होत्या. डाव्या बाजूच्या डोंगरउतारावर दगडी तटबंदीच्या आत लालचुटुक कौलांची घरे डोकावत होती. गाइडबरोबर केबलकारने एका उंच मनोऱ्यावर गेलो. तिथून निळ्याभोर एड्रियाटिक सागराचे मनसोक्त दर्शन घेतले. गार, भन्नाट वारा अंगावर घ्यायला मजा वाटली. तिथून जुने शहर बघायला गेलो. जुन्या शहराभोवती भक्कम दगडी भिंत आहे. दोन किलोमीटर लांब व सहा मीटर रुंद असलेल्या या खूप उंच भिंतीवरून चालत अनेक प्रवासी शहर दर्शन करीत होते. दगडी पेव्हर ब्लॉक्सच्या रस्त्यावर एका बाजूला चर्च व त्यासमोर ओनोफ्रिओ फाउंटन आहे. रोमन काळात दूरवरून पाणी आणण्यासाठी खांबांवर उभारलेल्या पन्हळीमधून उंचावरून येणारे पाणी...
Read More

हिन्दी साहित्य – यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #75 – 12 – जिम कार्बेट राष्ट्रीय वन अभ्यारण्य ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है. पर्यटन आपकी एक अभिरुचि है। इस सन्दर्भ में श्री अरुण डनायक जी हमारे  प्रबुद्ध पाठकों से अपनी कुमायूं यात्रा के संस्मरण साझा कर रहे हैं। आज प्रस्तुत है  “कुमायूं  – 12 – जिम कार्बेट राष्ट्रीय वन अभ्यारण्य ”) ☆ यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #76 – 12 – जिम कार्बेट राष्ट्रीय वन अभ्यारण्य ☆  जब से भारत...
Read More

हिन्दी साहित्य – यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #75 – 11 – जिम कार्बेट राष्ट्रीय वन अभ्यारण्य ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है. पर्यटन आपकी एक अभिरुचि है। इस सन्दर्भ में श्री अरुण डनायक जी हमारे  प्रबुद्ध पाठकों से अपनी कुमायूं यात्रा के संस्मरण साझा कर रहे हैं। आज प्रस्तुत है  “कुमायूं  - 11 – जिम कार्बेट राष्ट्रीय वन अभ्यारण्य ”) ☆ यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #76 - 11 – जिम कार्बेट राष्ट्रीय वन अभ्यारण्य ☆   नैनीताल में एक...
Read More

हिन्दी साहित्य – यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #75-10 – बिनसर वन अभ्यारण ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक (श्री अरुण कुमार डनायक जी  महात्मा गांधी जी के विचारों केअध्येता हैं. आप का जन्म दमोह जिले के हटा में 15 फरवरी 1958 को हुआ. सागर  विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वे भारतीय स्टेट बैंक में 1980 में भर्ती हुए. बैंक की सेवा से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृति पश्चात वे  सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए और अनेक रचनात्मक गतिविधियों से संलग्न है. गांधी के विचारों के अध्येता श्री अरुण डनायक जी वर्तमान में गांधी दर्शन को जन जन तक पहुँचाने के  लिए कभी नर्मदा यात्रा पर निकल पड़ते हैं तो कभी विद्यालयों में छात्रों के बीच पहुँच जाते है. पर्यटन आपकी एक अभिरुचि है। इस सन्दर्भ में श्री अरुण डनायक जी हमारे  प्रबुद्ध पाठकों से अपनी कुमायूं यात्रा के संस्मरण साझा कर रहे हैं। आज प्रस्तुत है  “कुमायूं -10 – बिनसर वन अभ्यारण”) ☆ यात्रा संस्मरण ☆ कुमायूं #75-10 – बिनसर वन अभ्यारण ☆  बिनसर वन अभ्यारण, अल्मोड़ा जिले में स्थित है । एक ऊंची...
Read More

मराठी साहित्य – विविधा ☆ जीवधन गड आणि नाणेघाट…भाग 1 ☆ श्री विनय माधव गोखले

 ☆ विविधा ☆ जीवधन गड आणि नाणेघाट…भाग 1 ☆ श्री विनय माधव गोखले ☆  ३० जानेवारी २०२१ रोजी मी रात्री १०:३० वाजता ‘गिरीदर्शन’ च्या ‘जीवधन’ गड ट्रेक साठी ‘व्याडेश्वर’ समोर पोहोचलो. परंतु नेहमीची बस आलेली नव्हती आणि त्याऐवजीची ठरवलेली बस उशिरा येत आहे असे शुभवर्तमान कळले. पुढे जवळजवळ तासभर मागील ट्रेकच्या एकमेकांच्या रंजक गप्पा मारण्यात / ऐकण्यात वेळ कसा गेला ते मात्र कळले नाही. बदली बस मात्र छोटी होती त्यामुळे सर्वजण सामानासह जेमतेमच मावले. नारायणगाव येथे रात्री १:३० ला चहा घ्यायला थांबली तेवढीच नंतर एकदम पायथ्याच्या घाटघर गावातील मुक्कामाच्या घरीच थांबली. घराबाहेर हवेतून एक “चर्र चर्र” असा आवाज ऐकू येत होता तो कुठून येतोय हे कळेना.  परंतु तेव्हा पहाटेचे ३:३० वाजलेले असल्याने आधी मिळेल तेवढी झोप घ्यावी आणि आवाजाचे कोडे सकाळी सोडवूयात असे ठरवून पथारी पसरल्या. पण थोड्याच वेळात मी जिथे झोपलो होतो त्याशेजारील बंद दरवाजाच्या फटीतून थंड हवा झुळुझुळू यायला सुरुवात होऊन थंडी वाजायला लागली. सकाळी तारवटलेल्या चेहेर्‍याने उठलो पण खिडकी उघडल्याउघडल्या ‘गुलाबी’ सूर्यदर्शन झाले आणि थकवा पार पळून गेला.  गरमागरम...
Read More
image_print