हिन्दी साहित्य – व्यंग्य ☆ शेष कुशल # ६२ ☆ व्यंग्य – “कोरट-कचहरियों की सम्मानजनक विदाई का स्वर्णिम दिन…” ☆ श्री शांतिलाल जैन ☆

श्री शांतिलाल जैन

(आदरणीय अग्रज एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन जी विगत दो  दशक से भी अधिक समय से व्यंग्य विधा के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपकी पुस्तक  ‘न जाना इस देश’ को साहित्य अकादमी के राजेंद्र अनुरागी पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके अतिरिक्त आप कई ख्यातिनाम पुरस्कारों से अलंकृत किए गए हैं। इनमें हरिकृष्ण तेलंग स्मृति सम्मान एवं डॉ ज्ञान चतुर्वेदी पुरस्कार प्रमुख हैं। श्री शांतिलाल जैन जी के  स्थायी स्तम्भ – शेष कुशल  में आज प्रस्तुत है उनका एक अप्रतिम और विचारणीय व्यंग्य  कोरट-कचहरियों की सम्मानजनक विदाई का स्वर्णिम दिन…” ।)

☆ शेष कुशल # ६२ ☆

☆ व्यंग्य – “कोरट-कचहरियों की सम्मानजनक विदाई का स्वर्णिम दिन – शांतिलाल जैन 

सूरज आज पूरब से तो नहीं ही निकला होगा. लोकतंत्र की स्थापना के आठ दशक से भी कम में मुल्क का भ्रष्टाचारियों, अपराधियों से मुक्त हो जाना कोई छोटी मोटी कामयाबी नहीं है. ऐसी कामयाबी उसी दिन मिला करती है जिस दिन सूरज पूरब से ना निकला हो. मुझे पक्का यकीन है आज सूरज पूरब से तो नहीं ही निकला होगा.

आज हुआ ये श्रीमान् कि इसके पहले कि आला कचहरी में वकील सा. अपने मुवक्किल के निर्दोष होने की अपील-दलील पेश कर पाते, जिरह होती, गवाहों सबूतों की बिला पर अपने मुवक्किल को दोषमुक्त करा पाते – प्रॉसिक्यूशन ने केस ही वापस ले लिया!!! अभियुक्त पिछली रात नौ बजे तक अपोजिशन में था, अगली सुबह नौ बजे हाकिम के दल में शामिल हो गया. सुबह का भूला था श्रीमान्, अगले दिन सुबह घर आ गया था, सो आप उसे भूला नहीं कह सकते. कभी मिला करती थी क्लीन चिटें अदालतों से, अब हाकिम ने मुकदमा वापिस लेकर उसकी जरूरत ही ख़तम कर दी है. रख लें अदालतें अपनी चिटें अपने पास.

हाकिम ने पार्टी का बड़ा और भव्य दफ्तर बनवाया है मगर बाहर डोर-बेल नहीं लगवाई. दरवज्जे पे न्याय का घंटा जो लटकवा लिया है. बजाईए. अंदर जाईए. क्लीन चिट पाईए और पाईए एक मलाईदार ओहदा भी. स्मार्ट लीडर्स करप्शन करके कारागार का रुख नहीं करते, उनके गेट पर लटका न्याय का घंटा बजा लेते हैं और सेफ झोन में प्रवेश कर जाते हैं. ‘सत्तापक्ष में कोई भ्रष्टाचारी नहीं होता और विपक्ष में कोई ईमानदार नहीं होता.’ न्यायशास्त्र का ये नया सिद्धांत है, जो इस अवधारणा को स्थापित करता है कि एक विपक्षमुक्त मुल्क ही भ्रष्टाचार मुक्त मुल्क का पर्याय होता है. देखते देखते न विपक्ष में न कोई नेता बचा है न मुल्क में भ्रष्टाचार का कोई आरोपी. इस तरह आज का मुकदमा दीवानी अदालतों में आख़िरी मुकदमा साबित हुआ.

क्रिमिनल केसेस पहले ही अदालतों में पेश होना बंद हो चुके थे. इसे आप कल्लू मिर्ची के केस से समझिए. उसकी बदमाशी का मुआमला सामने आया और हाकिम के नुमाईंदे जेसीबी पर सवार होकर निकल पड़े. देखते देखते उसका मकान ध्वस्त कर दिया गया. लो साहब, हो गया न्याय. धरा रह गया सत्र न्यायालय और बैठे रह गये ‘युवर ऑनर’. पड़ीं रह गईं एफआईआर, तफ़्तीश, साक्ष्य, विवेचना, केसडायरी, रिमांड, जमानत, चार्जशीट, भारतीय न्याय संहिता, वकील, मुवक्किल. कोर्ट-कचहरी के चक्कर में अब ना हाकिम पड़ता है न उसके नुमाईंदे. उनकी मर्ज़ी ही ‘ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ’ है. मुल्क के आईन में अब अदालतों की जरूरत ही नहीं बची. पूरी न्यायपालिका एक झटके में बेरोज़गार हो गई है. वकीलों, न्यायाधीशों, कचहरी के कारकूनों का रोज़गार छिन गया हैं. जस्टिस सर की बेंच पर नया कोई केस लिस्ट हो नहीं रहा. कारकून खाली बैठे हैं. वकील मुवक्किलों की तलाश में भटक रहे हैं. ‘हाजिर हो’ की आवाजें गुम हैं, निस्तब्ध निरापद सन्नाटा पसरा पड़ा है. आज का दिन न्यायपालिका की सम्मानजनक विदाई का दिन है.

लोकतंत्र की स्थापना के आठ दशक से भी कम में ही न्यायपालिका की जरूरत का ख़त्म हो जाना कोई छोटी मोटी कामयाबी नहीं है. ऐसी कामयाबी उसी दिन मिला करती है जिस दिन सूरज पूरब से ना निकला हो. मुझे पक्का यकीन है आज सूरज पूरब से तो नहीं ही निकला होगा.

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(टीप: यह आवश्यक नहीं है कि संपादक मंडल व्यंग्य /आलेख में व्यक्त विचारों/राय से सहमत हो।)

© शांतिलाल जैन 

बी-8/12, महानंदा नगर, उज्जैन (म.प्र.) – 456010

9425019837 (M)

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६४ ☆ # “सीने मे आग है…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता सीने मे आग है…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६४ ☆

☆ # “सीने मे आग है…” # ☆

सीने में आग है

आंखों में शोले है

कलम ने बगावत की

शब्द बारूद के गोले है

 

शब्द चुभो रहे हैं खंजर

जो बन गए हैं बंजर

उन मुर्दा इंसानों के

दिल के दरवाजे खोले हैं

 

जो गूंगे बहरे थे

जिस्म के जख्म गहरे थे

वह तड़प के जाग उठे

वह चिल्ला के धावा बोले है

 

जब हाथों में हाथ मिले

संघर्षों में साथ मिले

उनके हुंकारों को सुनकर

सिंहासन डोले है

 

वनों को काट दिया

सरमायेदारों में बांट दिया

निहत्थों ने कुल्हाड़ी उठाई तो

बोले यह कहां अब भोले हैं

 

शरीर पर लंगोटी है

कैसी किस्मत खोटी है

भूख के फाके हैं

अस्मत बाजार में तोले हैं

 

हर गरीब की यही कहानी है

आंखों से बहता पानी है

सैलाब ना आ जाए कहीं

टूट रहे बांधों के ताले हैं

 

झूठ की कश्ती पर

पाखंड की थामे पतवार

गंगा में डुबकी लगाकर

कहते हैं पाप धोले हैं/

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ अभिव्यक्ति # -१०७ – तेरा बलिदान सरहद पर… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘तेरा बलिदान सरहद पर।)

☆ अभिव्यक्ति # १०७ ☆ तेरा बलिदान सरहद पर☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

सजा दो गांव की गलियां, वो मेरा लाल आया है,

लिपट कर वो तिरंगे से, तिरंगा साथ लाया है।

बता दो सबकी आंखों को, कोई नम आंख न होए,

रखी है लाज बेटे ने, मां का सर उठाया है।

*

चिता को अग्नि देने को, हजारों बेटे आए हैं,

गया था जब, अकेला था, हजारों साथ लाया है।

सजाई है चिता उसकी, बिखेरे पुष्प देवों ने,

किया स्वागत, है अभिनंदन, यही सौगात लाया है।

*

सदा कहता था, है कर्जा, मुझ पर मातृ भूमि का,

नहीं रखा, कोई कर्जा, चुका कर ही वो आया है।

सुनाता था, कई किस्से, वो जब भी गांव आता था,

सभी किस्से अधूरे हैं, अधूरापन वो लाया है।

*

सहारा था मुझे तेरा, सहारा ना रहा अब तू,

सितारों से भरे नभ ने, सितारा नव सजाया है।

तेरा बलिदान सरहद पर, ना भूलेंगी कई सदियां,

हमेशा याद सब करना, यही सपना सजाया है।

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३३४ ☆ व्यंग्य – ‘बेजोड़’ जी की पीड़ा और परसाई ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆

डॉ कुंदन सिंह परिहार

(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं।   हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं।  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं।  उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपका एक अप्रतिम व्यंग्य – बेजोड़’ जी की पीड़ा और परसाई  इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार  # ३३४ ☆

☆ व्यंग्य ☆ ‘बेजोड़’ जी की पीड़ा और परसाई ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆

छोटेलाल ‘बेजोड़’ नगर के वज़नदार लेखक हैं। व्यंग्य लिखते हैं और व्यंग्य में ही बात करते हैं। अब तक पैंतालीस किताबें छपवा चुके हैं और  एक सौ अस्सी सम्मान या अभिनंदन करवा चुके हैं। उनकी तमन्ना भारत के हर शहर में सम्मान कराने की थी, जो पूरी हो चुकी है। हर शहर में उनका कोई न कोई चेला बैठा है जो सम्मान का जुगाड़ बैठाता रहता है।

यों तो ‘बेजोड़’ जी खासे मशहूर हैं, लेकिन लेखन में उन्हें वह मुकाम नहीं मिला जिसके वे आकांक्षी हैं। गंभीर साहित्य की दुनिया में उनकी पूछ-कदर नहीं है। यही बात ‘बेजोड़’ जी को सालती रहती है। उनकी सबसे ज़्यादा दुखती रग परसाई जी हैं। जब कहीं भी वे अपनी रचनाओं की चर्चा का जुगाड़ बैठाते हैं, घूम-घाम कर परसाई जी  रचनाओं से तुलना होने लगती है। हर बार निष्कर्ष यह निकलता है कि  ‘बेजोड़’ जी अच्छा  लिख रहे हैं, लेकिन परसाई जी से कुछ सीख लेते तो अच्छा होता। सुनकर ‘बेजोड़’ जी खिन्न हो जाते हैं। आयोजन वे जमाते हैं और तारीफ परसाई जी बटोर ले जाते हैं।

अपने वक्तव्यों में ‘बेजोड़’ जी अक्सर कहते हैं— ‘अब परसाई जी का ज़माना लद गया। अब हम जैसे लेखकों का ज़माना है। आलोचकों से  कहो कि परसाई जी को लांघ कर हम तक आयें।कब तक ‘परसाई’ ‘परसाई’ जपते रहेंगे?’

परसाई जी के वामपंथी होने पर भी बेजोड़ जी तल्ख टिप्पणी करते हैं। कहते हैं— ‘वामपंथी अच्छा लेखक हो ही नहीं सकता। वह एक विचारधारा में कैद हो जाता है, जड़ हो जाता है, कूपमंडूक हो जाता है। उसे अपनी नाक से आगे का कुछ दिखायी नहीं पड़ता। वह एक आंख से ही दुनिया को देखता है, दूसरी नहीं खोलता। इसीलिए मैं परसाई को महान लेखक नहीं मानता। लेखक को तो समुद्र की तरह विशाल हृदय वाला होना चाहिए। विचारधारा के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। वामपंथियों ने ज़बरदस्ती तारीफ कर कर के परसाई को महान बना दिया है।’

कई बार वे कहते हैं— ‘परसाई जी ने लिखा क्या है? कहीं वे लिखते हैं कि जिन राज्यों में दंगे हुए हैं उन्हें गणतंत्र दिवस की झांकी में दंगे ही दिखाना चाहिए। कहीं कहते हैं कि लड़कों को अपने बाप का आदेश नहीं मानना चाहिए। कहीं लिखते हैं कि पुरानी पीढ़ी नयी पीढ़ी के कंधों पर सवार हो गयी है। कहीं सुशीला उस लड़की को कहते हैं जो भाग कर शादी कर लेती है और बाप का पीएफ का पैसा बचा देती है। यह सब नयी पीढ़ी को बरगलाना नहीं तो और क्या है? नयी पीढ़ी को उत्तम संस्कार देने के बजाय ऊलजलूल बातें सिखा रहे हैं और फिर भी महान बने हुए हैं।’

कुछ दिनों से ‘बेजोड़’ जी एक नयी थियरी लेकर सामने आये हैं। कहते हैं, ‘एक रात मुझे सोचते-सोचते अचानक समझ में आया कि परसाई को महान क्यों माना जाता है। दरअसल  वे इसलिए बड़े माने जाते हैं क्योंकि विरोधियों के हाथों उनकी पिटाई हो गयी थी। इसमें कोई शक नहीं कि व्यंग्यकार के जीवन में प्रताड़ना का बहुत महत्व होता है। पिटाई हो जाए तो व्यंग्यकार एकदम ऊपर उठ जाता है। परसाई जी के बड़प्पन का यही राज़ है।

‘यह समझ में आने के बाद मैं लगातार कोशिश में हूं कि मेरी भी वाजिब पिटाई हो जाए ताकि मैं परसाई जी से आगे निकल जाऊं। इसी कोशिश में दो बार पटना में छात्रों के धरने में शामिल हो गया, लेकिन मेरे बालों की सफेदी देखकर पुलिस ने छोड़ दिया। उत्तर प्रदेश के किसी आंदोलन में शामिल होने की सोची थी, लेकिन हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वहां पिटाई से ज़्यादा ‘एनकाउंटर’ होते हैं। अब राजस्थान जाने की सोच रहा हूं, वहां बेरोज़गारों के आंदोलन की संभावना है। हरयाणा में एक कज़िन पुलिस में हैं, उनसे भी कह रखा है। वे बुलाएंगे तो वहां चला जाऊंगा। वे पिटाई का इंतज़ाम कर देंगे। परसाई जी का पैर खराब था, चलने फिरने से मजबूर थे, इसलिए उन्हें जबलपुर में ही पिटना पड़ा। मैं तो देश में कहीं भी पिट सकता हूं। पिटने  के बाद फोटो के साथ अखबारों में भेज दूंगा। छपते ही मेरा  कद एकदम बढ़ जाएगा। फिर परसाई को न कोई याद करेगा, न कोई पढ़ेगा। सब तरफ हम ही हम होंगे।’

अब ‘बेजोड़’ जी के चेले मनाते हैं कि ‘बेजोड़’ जी की मनोकामना शीघ्र पूरी हो और वे साहित्य में ऐसी बुलन्दी पर पहुंचें जहां उन्हें चुनौती देने वाला कोई न हो, परसाई भी नहीं।

© डॉ कुंदन सिंह परिहार

जबलपुर, मध्य प्रदेश

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# १०५ – क्रांति वीर – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– क्रांति वीर …” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # १०५ — क्रांति वीर — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

सन् 1857 के अपने एक कल्पित दस्तावेज के हवाले से मैं यह कहानी रच रहा हूँ। इस तारीख से बात करने की मेरी एक भावनात्मक सोच है। बात यह है उन्हीं दिनों बलिया वासी मेरा परदादा मॉरिशस आया था। पर यह मेरे परदादा की कहानी नहीं है। यह एक भारतीय परम वीर की कहानी है। अंग्रेजों के अधीन अपनी जन्मभूमि में क्रांति के जुनून के कारण गिरफ्तार हुआ था। वह किसी तरह जेल से भागा था। भारतीय मजदूर मॉरिशस लाने वाले जहाज की एक खेप में वह यहाँ आ गया था। अगले जहाज में अंग्रेज सरकार के सिपाही उसे यहाँ ढूँढने आ गए थे, लेकिन वे उसे पा न सके थे। उसे एक गुफा में छिपा कर रखा गया था। दिनों बाद यहीं उसकी मृत्यु हुई थी। सम्मान के साथ उसका दाह संस्कार किया गया था।

 © श्री रामदेव धुरंधर

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच # ३३५ – मैराथन ☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

श्री संजय भारद्वाज

(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको  पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।”

हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)

☆  संजय उवाच # ३३५ मैराथन… ?

…मैं यह काम करना चाहता था पर उसने अड़ंगा लगा दिया।

…मैं वह काम करना चाहती थी पर इसने टांग अड़ा दी।

…उसमें है ही क्या, उससे बेहतर तो इसे मैं करता पर मेरी स्थितियों के चलते..!

 ….अलां ने मेरे खिलाफ ये किया, फलां ने मेरे विरोध में यह किया…!

स्वयं को अधिक सक्षम, अधिक स्पर्धात्मक बनानेे का कोई प्रयास न करना, आत्मावलोकन न कर व्यक्तियों या स्थितियों को दोष देना, हताशाग्रस्त जीवन जीनेवालों से भरी पड़ी है दुनिया।

वस्तुतः जीवन मैराथन है। अपनी दौड़ खुद लगानी होती है। रास्ते, आयोजक, प्रतिभागी, मौसम किसी को भी दोष देकर पूरी नहीं होती मैराथन।

निदा फाज़ली जी ने लिखा है,

रास्ते को भी दोष दे, आँखें भी कर लाल,

चप्पल में जो कील है, पहले उसे निकाल।

अधिकांश लोग जीवन भर ये कील नहीं निकाल पाते। कील की चुभन पीड़ा देती है। दौड़ना तो दूर, चलना भी दूभर हो जाता है।

जिस किसीने यह कील निकाल ली, वह दौड़ने लगा। हार-जीत का निर्णय तो रेफरी करेगा पर दौड़ने से ऊर्जा का प्रवाह तो शुरू हुआ।

प्रवाह का आनंद लेने के लिए इसे पढ़ने या सुनने भर से कुछ नहीं होगा। इसे अपनाना होगा।

उम्मीद करता हूँ अपनी-अपनी चप्पल सबके हाथ में है और कील के निष्कासन की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।

© संजय भारद्वाज 

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

🕉️ हनुमान साधना संपन्न हुई। अगली साधना की जानकारी आपको शीघ्र दी जावेगी। 🕉️ 💥 

अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप  करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं। 

संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सलिल प्रवाह # २७९ – ममता के गाँव में… ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका गीत – ममता के गाँव में…)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २७९ ☆

☆ गीत – ममता के गाँव में… ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

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नेह नर्मदा कलकल बहती

शीतल अस्थि हुई हर दहती

कलकल करती लहर-लहर हँस-

श्वेत-श्याम पत्थर से कहती

कंकर को शंकर कर दूँ मैं

मेरा रहना

अमरकंटकी ठाँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

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सरला तरला मेरी धारा

पग-पग मठ मंदिर गुरुद्वारा

धुनी रमाए तीर कबीरा-

बंबुलिया दस दिश गुंजारा।

बहा पसीना

लक्ष्य मिलेगा पाँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

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वन-वन में भटके रघुवीर

दीन-दुखी की हर ली पीर

कान्हा पांडव का वनवास-

कहता चुके न संयम-धीर।

द्रुपद-सुता हर रक्षित

स्नेहिल दाँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

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धान-कटोरा भरे बिलासा

बैलाडीला रहे न प्यासा

बमलेश्वरि-दंतेश्वरि की जय-

राम ते अधिक राम का दासा

जन-मन रमता

गौ-गौरैया-काँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (18 मई से 24 मई 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (18 मई से 24 मई 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

जय श्री राम, आज मैंने यूट्यूब पर एक बहुत बड़े कथावाचक का वीडियो देखा। थंबनेल की हेडिंग थी हनुमान जी कोई देवता नहीं है। हालांकि उन्होंने एक नया शब्द देकर बताया की हनुमान जी ब्रह्मा विष्णु और महेश के बराबर शक्तिमान पुरुष हैं। उनकी बात मेरी समझ में नहीं आई। मेरे समझ में तो यही आता है कि मेरे सभी कष्टों का निवारण श्री हनुमान जी कर सकते हैं। हमें केवल उनके उनको याद करना है। श्री हनुमान जी को याद करने के लिए आज की चौपाई है :-

सब सुख लहै तुम्हारी सरना |

तुम रच्छक काहू को डर ना ||

चौपाई के संपुट पाठ करने से अगर आपको कोई डराने की कोशिश कर रहा है या आपके सुख में कमी आ रही है तो वह दूर हो जाएगा।

नासे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

आइये अब हम आपको इस सप्ताह, ग्रहों के विचरण की जानकारी देते हैं।

इस सप्ताह सूर्य और बुध वृष राशि में, मंगल मेष राशि में, गुरु और शुक्र मिथुन राशि में, शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे।

राशिवार साप्ताहिक राशिफल में सबसे पहले हम हमेशा की तरह मेष राशि की चर्चा करेंगे।

मेष राशि

इस सप्ताह व्यापारियों का व्यापार बहुत अच्छा रहेगा। धन आने का योग है। भाई बहनों के साथ आपके संबंध सामान्य रहेंगे। कचहरी के कार्यों में आपको ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहिए। आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, परंतु क्रोध की मात्रा भी बढ़ सकती है। आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त हो सकता है। आपकी प्रतिष्ठा में क्षति संभव है। कृपया अपने प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहें। आपका और आपके पिताजी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 21 और 22 तारीख किसी भी कार्य को करने के लिए सफलता दायक है। सप्ताह के अन्य दिन भी कार्यों को संपन्न करने के लिए ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

वृष राशि

व्यापारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। व्यापार में उन्नति संभव है। कर्मचारी एवं अधिकारियों को अपने वाणी पर थोड़ा कंट्रोल करना चाहिए अन्यथा उनको नुकसान हो सकता है। भाई बहनों के साथ आपका संबंध इस सप्ताह थोड़ा कम ठीक रहेगा। । वृष राशि के जातकों के लिए इस सप्ताह धन आने का योग है। भाग्य से सप्ताह आपको कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं हो पाएगा। आपको कोई भी कार्य संपन्न करने के लिए अपने परिश्रम और अपने कर्म पर विश्वास करना पड़ेगा। इस सप्ताह आपके लिए 18, 23 और 24 तारीख कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए ठीक है। सप्ताह के अन्य दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मिथुन राशि

अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। विवाह के प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि होगी। नए संबंध बन सकते हैं। कचहरी के कार्यों में आप बिल्कुल किसी भी तरह का रिस्क नहीं ले। अगर आपने नौकरी प्राप्त करने के लिए कोई प्रतियोगी परीक्षा दी है तो उसमें आप इस सप्ताह सफल हो सकते हैं। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 19 और 20 तारीख उपयोगी हैं। 18 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। आपको हानि हो सकती है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

कर्क राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का योग है। व्यापारियों का व्यापार अच्छी तरह से चलेगा। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। जनप्रतिनिधियों को अपनी प्रतिष्ठा में कमी देखने को मिल सकती है। प्रतिष्ठा के लिए उनको सावधान रहना चाहिए। दुर्घटनाओं के प्रति इस सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए। सतर्कता पूर्वक कार्य करने पर कचहरी के कार्यों में सफलता प्राप्त हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 21 और 22 तारीख लाभदायक है। 19 और 20 तारीख को आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

सिंह राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का योग है। व्यापार में उन्नति होगी। शासन के साथ व्यापार में आपको लाभ होगा। अधिकारियों से आपको सावधान रहना चाहिए। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद मिलेगी। दुर्घटनाओं से आपको सतर्क रहना चाहिए। कचहरी के कार्यों में आपको इस सप्ताह रिस्क नहीं लेना चाहिए। आपकी प्रतिष्ठा में इस सप्ताह वृद्धि हो सकती है। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। आपको अपने संतान से मदद मिल सकती है। छात्रों की पढ़ाई ठीक-ठाक चलेगी। इस सप्ताह आपके लिए 18, 23 और 24 तारीख फलदायक है। इन तारीखों में आपको किसी भी कार्य के अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। इस सप्ताह आपको 21 और 22 तारीख को सतर्क होकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन तांबे के पत्र में जल अक्षत और लाल पुष्प लेकर भगवान सूर्य को जल अर्पण करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

कन्या राशि

इस सप्ताह अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने सहयोगियों से तथा अपने अधिकारियों से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। आपको अच्छी पदस्थापना भी प्राप्त हो सकती है। इस सप्ताह आपको भाग्य पर आश्रित नहीं रहना चाहिए। अपने कर्म पर आपको विश्वास करना चाहिए। अगर आप कर्म पर विश्वास करके कार्य करेंगे तो आपको निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होगी। इस सप्ताह आपके लिए 19 और 20 तारीख कार्य करने के लिए अनुकूल हैं। 23 और 24 तारीख को आपको सजग रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

तुला राशि

इस सप्ताह भाग्य आपका साथ दे सकता है, मगर कार्यों को करते समय आपको थोड़ी सी सावधानी भी रखना चाहिए। दुर्घटनाओं से आपको सावधान रहना चाहिए। यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए अच्छा रहेगा। उनके क्रोध की मात्रा में थोड़ी वृद्धि हो सकती है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त नहीं हो पाएगा। छात्रों की पढ़ाई में रुकावट आएगी। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं हो पाएंगे। धन आने का योग है। इस सप्ताह आपके लिए 21 और 22 तारीख कार्यों को करने में परिणाम दायक है। इन तारीखों में काम करने पर आपको अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। 18 तारीख को कार्य करते समय आपको बहुत सचेत रहने की आवश्यकता है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें तथा शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह आपका मनोबल बहुत ऊपर रहेगा। अपने आत्मविश्वास से ही आप बहुत सारे कार्यों को निपटा सकते हैं। आपका व्यापार बहुत अच्छा चलेगा। इस सप्ताह आपको दुर्घटनाओं से सावधान रहने की आवश्यकता है। आप अपने शत्रुओं को इस सप्ताह थोड़ा सा प्रयास करने पर पराजित तथा समाप्त कर सकते हैं। इस सप्ताह आपको भाग्य के मामले में सावधान रहना चाहिए। कचहरी के कार्यों में किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 18, 23 और 24 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए लाभप्रद है। 21 और 22 तारीख को आपको अपने भाग्य से मदद मिल सकती है। 19 और 20 तारीख को आपको होशियार रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

धनु राशि

अगर आपका विवाह नहीं हुआ है तो इस सप्ताह आपके विवाह के प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि हो सकती है। नए संबंध भी बन सकते हैं। लंबी यात्रा का योग भी बन सकता है। व्यापार ठीक-ठाक चलेगा। शत्रु शांत रहेंगे। आपको संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है। छात्रों की पढ़ाई अच्छी चलेगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में थोड़ा तनाव आ सकता है। दुर्घटनाओं से आपको सावधान रहना चाहिए। सावधानी पूर्वक कार्य करने पर कचहरी के कार्यों में सफलता प्राप्त हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 19 और 20 तारीख परिणाम मूलक है। 18 तथा 21 और 22 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

मकर राशि

इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। इसके लिए आपको मामूली प्रयास करने पड़ेंगे। माता जी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। पिताजी के डायबिटीज या ब्लड प्रेशर में वृद्धि हो सकती है। आपको अपने संतान से थोड़ी मदद मिल सकती है। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। पेट में कुछ तकलीफ हो सकती है। धन प्राप्त करने के लिए आपको विशेष प्रयास करने पड़ेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 21 और 22 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों में असरकारी है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

कुंभ राशि

इस सप्ताह आपका अपने भाई बहनों के साथ अच्छा संबंध रहेगा। आपके भाई बहनों की उन्नति भी हो सकती है। सामान्य धन आने का योग है। व्यापार ठीक चलेगा। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। कुछ लोग इसमें रुकावट खड़ी कर सकते हैं। आपके संतान के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। आपको संतान से सहयोग भी प्राप्त होगा। छात्रों की पढ़ाई में समस्या हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 18 तथा 23 और 24 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए प्रभावशाली है। 21 और 22 तारीख को आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मीन राशि

इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि संभव है। मगर इसके लिए आपको प्रयास भी करनी पड़ेंगे। धन आने का अच्छा योग है। इस सप्ताह आपको धन प्राप्ति का पूरा प्रयास करना चाहिए। व्यापारियों का व्यापार इस सप्ताह ठीक चलेगा आपको अपने भाई बहनों से थोड़ा सावधान रहना चाहिए। आपके संतान को इस सप्ताह कष्ट हो सकता है। आपको इस पर ध्यान देना चाहिए। भाग्य से आपको लाभ होगा। इस सप्ताह आपके लिए 19 और 20 तारीख कार्यों को करने के लिए उपयुक्त है। 21 और 22 तारीख आपकी संतान के लिए अच्छी है। 23 और 24 तारीख को आपको सजग रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ लघुकथा – “मोमबत्तियां” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

श्री कमलेश भारतीय 

(जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता)

☆ लघुकथा – “मोमबत्तियां” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

– मां ये मोमबत्तियां जलाकर क्यों चल रहे हैं अंकल लोग?

– बेटा, ये कुछ अक्ल के अंधों को रोशनी दिखाने निकले हैं !

– मम्मी, मोमबत्तियां पिघलने लगेंगीं तो गर्म मोम उंगलियों‌ पर गिरेगा, ये तो किसी का क्या बिगड़ा? अपना ही हाथ जलेगा !

– बात तो ठीक है तेरी। फिर तेरी नज़र में क्या करना चाहिए?

– मैं तो कहती हूँ कि ये मोमबत्तियां लेकर उस पापी को जलाओ, जिसने यह गंदा काम किया है !

मां अपनी नन्ही सी बेटी का मुंह देखती रह गयी !!

© श्री कमलेश भारतीय

पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी

संपर्क :   1034-बी, अर्बन एस्टेट-।।, हिसार-125005 (हरियाणा) मो. 94160-47075

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३० – आशनाई… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर ☆

डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “आशनाई“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३० ?

? आशनाई… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

क्यों आप मेरी ओर कभी झाँकते नहीं

चाहत की कीमतों को कभी आँकते नहीं

=2=

है साथ निभाने का अटल वादा हमारा

हम इश्क़ में कभी भी डींग हाँकते नहीं

=3=

हम इश्क के धागे में पिरोते हैं मुहब्बत

पर आप कभी उसमें वफ़ा टाँकते नहीं

=4=

अपना पड़ाव दिलरुबा की रहगुजर में है

हम दूसरी गलियों की धूल फाँकते नहीं

=5=

अपनी खुली क़िताब है ‘राजेश’ ज़िन्दगी

हम अपनी आशनाई  कभी ढाँकते नहीं

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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