मराठी साहित्य – सूचनाएँ ☆ संपादकीय निवेदन – श्री राजीव पुजारी – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

श्री राजीव पुजारी

💐 अ भि नं द न 💐

अधिकतर विज्ञान-विषयक माहितीपूर्ण लेख लिहिणारे आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखक श्री राजीव पुजारी यांना उत्कृष्ट वाङ्मय निर्मितीसाठी “ आशीर्वाद पुरस्कार “ जाहीर…

गेली २७ वर्षे सातत्याने वंदना प्रकाशन, मुंबई ह्या संस्थेतर्फे उत्कृष्ट मराठी वाङ्मय निर्मितीसाठी देण्यात येणाऱ्या ‘आशीर्वाद पुरस्कार’ ह्या मानाच्या पुरस्काराची घोषणा नुकतीच झाली.

या पुरस्कारासाठी सांगलीचे श्री राजीव पुजारी यांच्या ‘अंतराळवेध’ या पुस्तकाची संकीर्ण या विभागात निवड झालेली आहे.

हे पुस्तक अहमदाबादच्या क्राउन प्रकाशनने प्रकाशित केले होते. ह्या मानाच्या पुरस्कारासाठी देश विदेशातून एकूण ३४८ पुस्तके आलेली होती हे आवर्जून सांगायलाच हवे.

या पुस्तकाविषयी – – 

हे पुस्तक अवकाश विज्ञानाला वाहिलेले आहे. या पुस्तकात नासा व इस्रो द्वारा आयोजित विविध अंतराळ मोहिमांचा समावेश आहे. १० लेखांचा समावेश असलेला एक विशेष विभाग नासाच्या मंगळ २०२० मोहिमेला समर्पित आहे. याशिवाय LCRD, IXPE, DART, LUCY जेम्स वेब अंतरीक्ष दुर्बीण, आर्टिमिस योजना, चांद्रयान-३, गुरुत्वीय लहरी, आदित्य L1, नासाची मंगळ ग्रहावरील मातीचे नमुने परत आणण्याची मोहीम इत्यादी मोहिमांवर अभ्यासपूर्ण लेख आहेत. यासोबतच दोन रंजक अंतराळ कथा आहेत. शेवटचा विभाग संशोधक व संशोधन संस्था यांसंबंधी आहे. यामध्ये डॉ विक्रम साराभाई, प्रो यू आर राव, के कस्तुरीरंगन, एम जी के मेनन, डॉ सतीश धवन यांचेविषयी माहिती आहे. तसेच इस्रो व त्याच्या विविध केंद्रांची माहिती आहे. एकंदरीतच हे पुस्तक वाचनाचा आनंद देणारे आहे.

… इतका मानाचा पुरस्कार मिळाल्याबद्दल श्री. राजीव पुजारी यांचे सर्व थरांतून कौतुक होत आहे.

आपल्या सर्वांतर्फे श्री. राजीव पुजारी यांचे त्रिवार अभिनंदन. आणि यापुढेही असेच माहितीपूर्ण आणि उत्कृष्ट लिखाण असणारे साहित्य त्यांच्याकडून लिहिले जावे आणि असेच अनेक मानाचे पुरस्कार त्यांना मिळत रहावेत यासाठी मनःपूर्वक अगणित शुभेच्छा.

 संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

☆ ☆ ☆ ☆ ☆

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ ☆ हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, गणेशखिंड में एमपीएससी यूपीएससी परीक्षा हेतु व्याख्यान संपन्न ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, गणेशखिंड में एमपीएससी यूपीएससी परीक्षा हेतु व्याख्यान संपन्न ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

दिनांक 29 सितंबर 2026 को हिंदी विभाग के द्वारा हिंदी पखवाड़ा समापन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था l इस उपलक्ष्य में एमपीएससी और यूपीएससी परीक्षा हेतु मार्गदर्शनपरक व्याख्यान का आयोजन किया गया था जिसमें श्री सचिन कदम, दृष्टि आईएएस, पुणे के वरिष्ठ फैकल्टी प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित थेl

वाणिज्य शाखा के उपप्राचार्य डॉ. पराग शाह ने श्री सचिन कदम का स्वागत और सम्मान किया l साथ ही उन्होंने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उसके दिनोंदिन बढ़ते महत्व को भी प्रतिपादित किया। इस अवसर पर उपस्थित कला शाखा की उपप्राचार्य डॉ. गौरी कोपरडेकर ने हिंदी पखवाड़ा की शुभकामनाएँ सबको दी।

हिंदी विभाग प्रमुख डॉ. प्रेरणा उबाळे ने सभी मान्यवरो का स्वागत करते हुए प्रस्तुत आयोजन के संदर्भ में अपनी भूमिका सबके सामने रखी l उपस्थित अतिथि और सभी छात्रों को मॉडर्न महाविद्यालय की लोकप्रिय गतिविधियों – जैसे – प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी, खेल में अनेक उपलब्धियाँ, वार्षिक महोत्सवों का आयोजन, आविष्कार प्रतियोगिता, विभिन्न विभागों के द्वारा आयोजित उत्सव आदि का परिचय डॉ. प्रेरणा उबाळे ने देते हुए कहा कि छात्र यदि महाविद्यालय में होने वाली सभी गतिविधियों या प्रतियोगिताओं में सहभागी होंगे तो उन्हें व्यक्तित्व विकास के लिए अन्य किसी कोर्स की आवश्यकता नहीं होगी। हिंदी विभाग प्रतिवर्ष हिंदी दिवस और हिंदी पखवाड़ा मनाता है l इस वर्ष छात्रों को अपने भविष्य की नई राह मिले, इसलिए एमपीएससी और यूपीएससी के अंतर्गत आने वाले विभिन्न पदों और उसके लिए आवश्यक तैयारी के संदर्भ में जानकारी देने हेतु हिंदी विभाग ने दृष्टि आईएएस के श्री सचिन कदम का व्याख्यान आयोजित किया।

दृष्टि आईएएस, पुणे के वरिष्ठ फैकल्टी श्री सचिन कदम ने छात्रों को दोनों परीक्षाओं के स्वरूप और उसके अंतर्गत दी जा सकने वाली विभिन्न परीक्षाओं के पाठ्यक्रमों की जानकारी दी और बताया कि विद्यार्थी अपने अधिकारी बनने के सपनों पर कैसे खरे उतर सकते हैं l उन्होंने अपनी सहज, सरल भाषा में छात्रों को विषयों की गहराई समझाई l साथ ही परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने के लिए समर्पण और समय की आवश्यकता प्रतिपादित की। सचिन कदम के व्याख्यान से छात्र अत्यंत लाभान्वित हुए और उन्हें मुग्ध कर दिया और छात्रों ने अत्यंत उत्साह से उनसे चर्चा की।

प्रस्तुत व्याख्यान के लिए 50 से अधिक छात्र उपस्थित रहें तथा मॉडर्न महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक डॉ. संस्कृति अवलगांवकर, डॉ. ज्योति आर्य, डॉ. शिली जॉन, डॉ. मोतीलाल मोरे उपस्थित थे l मॉडर्न महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय खरात के मार्गदर्शन से कार्यक्रम संपन्न हुआ l कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग की प्राध्यापक डॉ अनुराधा रौंदले ने किया तथा अंत में डॉ. प्रेरणा उबाळे कार्यक्रम संयोजन हेतु सहायता करने वाले सभी के प्रति आभार व्यापित किए। संपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत सुंदर और सुचारू ढंग से संपन्न हुआ।

 

साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे

अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे

संपर्क- 7028525378

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना 📖 ☆ सम्पादक मंडल ई-अभिव्यक्ति ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

📖 प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना !! 📖

कुछ अपरिहार्य कारणों से गुरुवार दि. १/१०/२६ से  दि. ४/१०/२६ (४ दिवस) तक ई-अभिव्यक्ति का प्रकाशन बंद रहेगा। 

आप सभी का इसी प्रकार स्नेह, प्रतिसाद और सहयोग अपेक्षित है।

 

– संपादक मंडल 

ई-अभिव्यक्ति 

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ – भोपाल के लेखक सुरेश पटवा लेखक गाँव देहरादून में सम्मानित – ☆ संयोजक – अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹– भोपाल के लेखक सुरेश पटवा लेखक गाँव देहरादून में सम्मानित –🌹

अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच का 13 वां अधिवेशन दिनांक 26 सितंबर 2026 को देहरादून की वरिष्ठ साहित्यकार विद्या सिंह की अध्यक्षता में, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा पूर्व मुख्य मंत्री, उत्तराखंड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के मुख्य आतिथ्य, सुरेश पटवा और जया आनंद के विशिष्ट आतिथ्य में देहरादून के निकट सुरम्य धुंध भरी हिमालयी पहाड़ियों से घिरी थानों घाटी स्थित लेखक गांव में आयोजित किया गया। मंच की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव और प्रमिला वर्मा भी मंचासीन रहीं।

सर्वप्रथम सरस्वती वंदना उपरांत सम्मिलित साहित्यकारों के परिचय से सत्र आरम्भ हुआ। प्रमिला वर्मा ने विश्व मैत्री मंच की स्थापना और विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की।

विभिन्न साहित्यकारों सहित सुरेश पटवा ने अपनी “सृजन यात्रा” पर बोलते हुए कहा कि “उन्हें बचपन से किताबें पढ़ने का चाव था। वे 38 साल स्टेट बैंक में विभिन्न प्रशासकीय पदों पर तैनाती के दौरान भी निरंतर विश्व स्तरीय कालजयी साहित्य के साथ, इतिहास, दर्शन और वांग्यम साहित्य का अध्ययन करते रहे हैं।

बैंक सेवा के अंतिम दौर में जब प्रसिद्ध इतिहासकार रमेश चंद मजूमदार का बारह खण्डों में लिखा “भारत का इतिहास” पढ़ रहे थे तब उन्हें यह अहसास हुआ कि उन्हें इतिहास की गलियों से भारत की ग़ुलामी की पड़ताल करनी चाहिए। लेकिन इस विषय ओर कोई एक किताब उन्हें ढूँढने ओर भी नहीं मिली तो उन्होंने मुग़लों का पतनोन्मुख इतिहास के साथ मराठों का इतिहास, सिक्खों का इतिहास, कर्नाटक युद्धों का इतिहास, ब्रिटिश इतिहास सहित दक्षिण भारत के इतिहास का गहन अध्ययन किया। तत्पश्चात 2018 में पहली किताब “गुलामी की कहानी” प्रकाशित हुए।

सुरेश पटवा बचपन से ही पचमढ़ी के चप्पे-चप्पे से वाक़िफ़ थे। उन्होंने जेम्स फ़ोर्सिथ की “हाईलैंड ऑफ़ सेंट्रल इंडिया” को आधार बना कर “पचमढ़ी की खोज” किताब लिखी।

स्त्री-पुरुष के रिश्तों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल करते हुए “स्त्री-पुरुष” किताब लिखी।

नर्मदा घाटी के निवासी होने के नाते, नर्मदा उन्हें सहज ही बुलाती थी। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा कर तीसरी किताब “समृद्धि और सौंदर्य की नदी- नर्मदा” लिखी।

उन्होंने सम्पूर्ण सतपुड़ा पर्वत की सघन यात्रा के बाद “सुरम्य सतपुड़ा” किताब लिखी। मिर्ज़ा ग़ालिब की जीवनी ओर आधारित “दास्तान-ए-मिर्ज़ा ग़ालिब” बहुत सराही जा रही है। वे आदि शंकराचार्य की जीवनी पर आधारित उपन्यास लिख रहे हैं। इसी तारतम्य में उन्होंने “वेदों से वेदांत” और वेदांत से वैराग्य” के साथ “मैं की यात्रा का पथिक” तीन किताबें लिखीं। उनके दो व्यंग्य संग्रह, दो लघुकथा संग्रह और हिंदी सिनेमा के से स्वर्णयुग के इतिहास पर पाँच किताबें प्रकाशित हैं। इस तरह उनकी ग़ज़ल और काव्य संग्रह सहित कुल 37 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनकी इस अनोखी साहित्य साधना हेतु उन्हें 17 राष्ट्रीय स्तर के सम्मान से विभूषित किया जा चुका है। सम्मेलन में अध्यक्ष और मुख्य अतिथि द्वारा सुरेश पटवा को सम्मानित कर प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंत में रचनाकारों ने काव्यपाठ किया। सभा दुबे ने आभार प्रदर्शन किया।

(पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा पूर्व मुख्य मंत्री, उत्तराखंड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ से सम्मान पत्र ग्रहण करते हुए श्री सुरेश पटवा)

संयोजक – अंतराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच, देहरादून

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≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ – ‘स्वयंभू और तुलसीदास रचित रामकथा’ का विमोचन हुआ – ☆ साभार – क्षितिज ब्यूरो ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹– ‘स्वयंभू और तुलसीदास रचित रामकथा’ का विमोचन हुआ –🌹

श्रीराम, भारतीय संस्कृति के शलाका पुरुष हैं। रामकथा कल-कल प्रवाहित होती धारा है। यही कारण है कि भारत में विभिन्न भाषाओं में रामकथा पर आधारित लगभग 300 ग्रंथ हैैं। स्थूल रूप से ये सभी रामायण से अनुप्राणित हैं। आचार्य स्वयंभू का ‘पउमचरिउ’ इनमें अपवाद है। यह जैन दर्शन को केंद्र में रखकर रचा गया है। इसके चलते इस ग्रंथ में वाल्मीकि कृत मूल रामकथा में कई बड़े बदलाव दृष्टिगोचर होते हैं।

इसमें रावण का वध श्रीराम के हाथों ना होकर लक्ष्मण के हाथों कराया गया है। प्रचलित रामकथा के कुछ पात्रों के नाम में परिवर्तन भी इसमें देखने को मिलते हैं। हनुमान जी को ब्रह्मचारी के बजाय गृहस्थ रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘पउमचरिउ’ के रावण का खलनायकत्व भी उसके प्रति सहानुभूति जगाने में सहायक है।

जो भी हो, अपनी-अपनी मान्यता, दर्शन और विश्वास के अनुसार श्रीराम की जीवनगाथा हर मत-मतांतर ने ग्रहण की है। अतः अपने-अपने होकर भी श्रीराम सबके हैं। उदार और सर्वसमावेशी व्यक्तित्व से ही वे श्रीराम हैं।

श्री संजय भारद्वाज

ये उद्गार हिंदी आंदोलन परिवार के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री संजय भारद्वाज ने व्यक्त किए। वे क्षितिज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. मृणालिनी शहा और डॉ. लतिका जाधव द्वारा संपादित ‘स्वयंभू और तुलसीदास रचित रामकथा’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। यह पुस्तक मूल रूप से स्व. गजानन नरसिंह साठे के शोध पर आधारित है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पुणे विश्वविद्यालय के जैन अध्यासन के प्रमुख प्रो. के. के. जैन ने कहा कि ‘पउमचरिउ’ में राम चरित को जैन सिद्धांतों के अनुसार ढाला गया है। विभिन्न समाज महापुरुषों को अपने-अपने ढंग से व्यंजित करते हैं। जैन दर्शन में राम वासुदेव हैं, लक्ष्मण नारायण हैं जबकि रावण प्रति वासुदेव है। दोनों महाकाव्य  का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए स्वर्गीय डॉ. साठे ने पूर्ण निष्पक्ष भाव से विवेचन किया है।

डॉ. मृणालिनी शाह ने बताया कि अमेरिका में आयोजित एक रिलिजन कॉन्फ्रेंस में पेपर पढ़ने के लिए उन्होंने जैन रामायण चुनी थी। इस विषय पर काम करते हुए उन्हें डॉ. साठे के शोध का संदर्भ मिला। योगायोग से डॉ. साठे, डॉ शहा के समधी के मामा निकले। उनके शोध को पढ़ने के बाद दोनों संपादकों के मन में उसे पुस्तक रूप देने का विचार आया। फलत: इस पुस्तक का जन्म हुआ।

डॉ. लतिका जाधव ने कार्यक्रम का सुचारु एवं सटीक संचालन किया। श्रीकृष्ण नामजोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। अभिजीत शहा ने आभार प्रदर्शन किया। साहिल जाधव का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में उल्लेखनीय संख्या में पुस्तक प्रेमी श्रोता उपस्थित थे।

  —

 – क्षितिज ब्यूरो की रिपोर्ट

≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – सूचनाएँ ☆ संपादकीय निवेदन – श्री सुनील देशपांडे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

श्री सुनील देशपांडे

💐 अ भि नं द न 💐

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखक श्री. सुनील देशपांडे यांना त्यांनी लिहिलेल्या 

“Organ Donation” या इंग्लिश पुस्तकासाठी नुकतेच ‘ अनंत प्रेस इंटरनॅशनल ‘ यांच्यातर्फे – – 

“अनंत प्रेस साहित्य रत्न अवॉर्ड“ हा मानाचा पुरस्कार देऊन गौरवण्यात आले आहे.

Anant Press ही संस्था.. “ India’s most trusted & authentic platform for recognising literary excellence “.. म्हणूनच ओळखली जाते हे इथे आवर्जून सांगायलाच हवे.

श्री. सुनील देशपांडे यांचे सामाजिक दृष्टिकोनातून लिहिलेले “Organ Donation” हे पुस्तक सामाजिक कार्यकर्ते आणि या कामाचे समन्वयक यांच्यासाठी उत्तम मार्गदर्शक आहे.

‘अवयव दान‘ हा विषय खूप महत्वाचा, समाजोपयोगी आणि समाजातल्या प्रत्येक व्यक्तीने विचारात घ्यावा असाच आहे हेही इथे आवर्जून नमूद करायला हवे.

आपल्या सर्वांतर्फे श्री. सुनील देशपांडे यांचे अगदी मनःपूर्वक अभिनंदन आणि समाजोपयोगी तसेच समाजप्रबोधक अशा त्यांच्या उत्कृष्ट कार्यासाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा.

 संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

☆ ☆ ☆ ☆ ☆

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना 📖 ☆ सम्पादक मंडल ई-अभिव्यक्ति ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

📖 प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना !! 📖

कुछ अपरिहार्य कारणों से शुक्रवार दि. ४/९/२६ से  दि. ७/९/२६ (४ दिवस) तक ई-अभिव्यक्ति का प्रकाशन बंद रहेगा। 

आप सभी का इसी प्रकार स्नेह, प्रतिसाद और सहयोग अपेक्षित है।

 

– संपादक मंडल 

ई-अभिव्यक्ति 

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ दि. ४/९/२६ ते दि. ७/९/२६ — अंक बंद असल्याबद्दल महत्वाची सूचना!!!! 📖 ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

💐 संपादकीय निवेदन 💐

📖 दि. ४/९/२६ ते दि. ७/९/२६ — अंक बंद असल्याबद्दल महत्वाची सूचना!! 📖

कृपया सर्वांनी नोंद घ्यावी – – 

काही अपरिहार्य कारणामुळे शुक्रवार दि. ४/९/२६ ते सोमवार दि. ७/९/२६ असे ४ दिवस दैनिक अंक प्रकाशित केला जाणार नाही. मंगळवार दि. ८/९/२६ पासून अंक नेहेमीप्रमाणे प्रकाशित केला जाईल. 

सर्वांचे सहकार्य अपेक्षित आहे. 

ई-अभिव्यक्ती, मराठी विभाग.– संपादक मंडळ

ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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ई-अभिव्यक्ति संवाद ☆ शिक्षाविद्, लोक-विज्ञानी स्व. डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव जी के 110वें जन्मोत्सव “बुन्देली दिवस” पर विशेष ☆ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर ☆

🟢 शिक्षाविद्, लोक-विज्ञानी स्व. डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव 🟢

(1 सितम्बर 110वें जन्मोत्सव “बुन्देली दिवस” पर विशेष)

प्रिय प्रबुद्ध पाठक गण, 

ई-अभिव्यक्ति का आज का अंक शिक्षाविद्, लोक-विज्ञानी स्व. डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव को समर्पित है. पुनर्पाठ के अंतर्गत 1 सितम्बर 110वें जन्मोत्सव “बुन्देली दिवस” के अवसर पर विगत वर्ष बुन्देली दिवस पर प्रकाशित विशेष रचनाएँ आपके अवलोकनार्थ सादर प्रस्तुत हैं.

 – हेमन्त बावनकर,  संस्थापक संपादक ई- अभिव्यक्ति, पुणे 

 

🟢

आप निम्नलिखित टेक्स्ट अथवा लिंक पर क्लिक कर रचनाएँ पढ़ सकते हैं 👉

 

https://e-abhivyakti.com/?p=98005

https://e-abhivyakti.com/?p=17108 

https://e-abhivyakti.com/?p=98404

https://e-abhivyakti.com/?p=98416

https://e-abhivyakti.com/?p=98423

https://e-abhivyakti.com/?p=98421

https://e-abhivyakti.com/?p=98406

https://e-abhivyakti.com/?p=98407

https://e-abhivyakti.com/?p=98405

https://e-abhivyakti.com/?p=93310

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≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ पाऊस… + संपादकीय निवेदन – सौ. दीप्ती कुलकर्णी – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

सौ. दीप्ती कुलकर्णी

💐 अ भि नं द न 💐

गाडगीळ मॅनेजमेंट, सांगली आयोजित मराठी काव्य लेखन स्पर्धेत आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका श्रीमती दीप्ती कुलकर्णी यांच्या काव्य रचनेस उत्तेजनार्थ पुरस्कार मिळाला आहे. ई अभिव्यक्ती मराठी तर्फे श्रीमती दीप्ती कुलकर्णी यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि पुढील वाटचालीसाठी शुभेच्छा 💐🖊️

पुरस्कार प्राप्त कविता आज प्रकाशित करत आहोत.

 संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

☆ ☆ ☆ ☆ ☆

पुरस्कार प्राप्त कविता

? कवितेचा उत्सव ?

☆ “पाऊस” ☆ दीप्ती कुलकर्णी ☆

☆

 पाऊस आला, पाऊस आला, घेऊन मृदगंधाला

ग्रीष्मातील त्या उष्ण धरेचा, कणकण संतोषला

जलधारांनी बरसत आला, थेंबातुनी प्रगटला

बळीराजाही पेरायाला, शिवारात गुंतला ||१||

 *

इंद्रधनुचा मोहक पट तो, आकाशी उमटला

बालचमुसह सर्वांसाठी, आनंददायी बनला

जलाशयांचा, तरुवेलींचा, जीवनदाता ठरला

चिंबही भिजल्या सृष्टीचा तो, सखा जणू भासला ||२||

 *

धरतीनेही हिरवा शालु, अंगभरी ल्यायला

गवतफुलांचा, फळाफुलांचा, सुगंध साकारला

मातीतुनी या नवकोंबांचा, हर्ष दिसू लागला

तनामनाने चाहुल घेता, आसमंती विहरला ||३||

 *

चातकासही थेंबा घेऊनी, जन्म नवा लाभला

रिमझिम येता जलधारांचा, नाद ही झंकारला

पाऊस आला, पाऊस आला, मोद असा जाहला

नव आशांचा, नव स्वप्नांचा, झुला जणू झुलला ||४||

☆

© दीप्ती कुलकर्णी

कोल्हापूर

भ्र. ९५५२४४८४६१

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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