श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “नाड़ी दोष…“।)
अभी अभी # ९२९ ⇒ आलेख – नाड़ी दोष
श्री प्रदीप शर्मा
कबीर कोई नाड़ी वैद्य नहीं थे और ना ही कोई ज्योतिषी, जो लोगों की जन्म पत्री में नाड़ी दोष निकालते बैठते। वे कोई हठयोगी भी नहीं थे, महज एक जुलाहे थे, जो ताना बाना बुनते थे और सहज रूप से ईड़ा, पिंगला और सुषुम्ना की बातें करते थे। साधो ! सहज समाधि भली।
जितनी कृष्ण की रानियां थीं, उससे अधिक तो हमारे शरीर में नस -नाड़ियां हैं। हम श्रीकृष्ण नहीं, हमें सिर्फ या तो नारियों में दोष दिखाई देता है, या फिर इंसानों में नाड़ी – दोष ! ठीक है, अगर किसी में नाड़ी दोष है तो किसी नाड़ी – वैद्य को बताओ। नहीं ! वे नाड़ी – दोष के लिए किसी ज्योतिषी की सलाह लेते हैं। बस यहीं कबीर का दिमाग खराब हो जाता है। वह अपने कुल को ही दोष देने लग जाता है :
बूढ़ा वंश कबीर का,
उपजा पूत कमाल।।
ज्योतिषी कुंडली में विवाह के पूर्व वर – वधू के गुण मिलाते हैं। नक्षत्रों का मिलान करते हैं। दो सितारों का ज़मीं पर है मिलन, पहले बत्तीस गुण, फिर सगाई और उसके बाद बारात। अगर फिर भी बात ना बने तो ! नाड़ी दोष और क्या। महाराज कोई निदान ? हां यजमान गऊ दान, तुरंत समाधान।
पहले उन्हें नाड़ी वैद्य कहते थे, विज्ञान उन्हें न्यूरो सर्जन कहता है। कलाई गोरी हो या काली, उसे थामने का अधिकार सिर्फ डॉक्टर, वैद्य अथवा एक चूड़ी वाले को ही होता है। नाडी वैद्य अगर नाड़ी देखकर मर्ज पहचान जाता है तो डॉक्टर अपने यंत्र द्वारा पल्स रेट और दिल की धड़कन जानकर। डॉक्टर आपके दिल पर हाथ नहीं रखता, बस यंत्र द्वारा बीमारी को टटोल लेता है। ज़ोर से सांस लो, छोड़ो। आंखों से आंखें नहीं मिलाता, टॉर्च से रोशनी फेंकता है। इन आंखों का रंग हो गया, गुलाबी गुलाबी ! कहीं कंजेक्टिवाइटिस तो नहीं ? नहीं, नहीं सब ठीक है। हल्की सी हरारत है। सब ठीक हो जाएगा एंटीबायोटिक से।।
तब लक्स अंडरवियर और बनियान का प्रचलन नहीं था। बंबइया पट्टेदारी चड्डी और जेब वाले बनियान मां घर पर ही सीती थी। बाहर के लिए कुर्ता पायजामा। तब भी हम नाड़ी दोष से परेशान रहते थे। पुराने टूथ ब्रश की डंडी से ही नाड़ी दोष दूर हो जाता था। बाद में तो इस धर्म संकट से बचने के लिए एक सेफ्टी पिन पायजामे के साथ ही नत्थी कर दी जाती थी। आज इलेस्टिक ने एक आम इंसान की इज्जत बचा ली। उसे नाड़ी दोष से मुक्त कर दिया।
आज सी टी स्कैन और एम आर आई जैसी आधुनिक तकनीक से रीढ़ की हड्डी से लेकर मस्तिष्क तक की सभी नस नाड़ियों की जांच संभव है, फिर भी मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यूं ज्यूं दवा की।
कहीं नाड़ी दोष तो कहीं पितृ दोष। दान पुण्य, ज्योतिष, नीम हकीम। क्या क्या न किए हमने खट करम आपकी खातिर।।
नाड़ी वैद्य ना सही, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हम नियमित व्यायाम और नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कर सकते हैं। नाड़ी दोष से भी अधिक खतरनाक आजकल राजनीतिक दोष हो गया है जहां कहीं भी किसी को गुण नजर ही नहीं आता। किसी की कलाई मरोड़ी तो किसी की कलाई खोली। काश कोई नाड़ी वैद्य इन बीमारों की बीमारी जड़ से पकड़ ले तो समाज का नाड़ी दोष दूर हो जाए। हमारी संस्कृति और सभ्यता की गाड़ी वापस रास्ते पर आ जाए। डर है, कहीं कोई यहां भी पितृ दोष ना निकाल दे ..!!!
© श्री प्रदीप शर्मा
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