श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘नारी तुम खुद की पहचान हो…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १०८ ☆
☆ नारी तुम खुद की पहचान हो… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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नारी, तुम खुद की पहचान हो,
छाया नहीं किसी की तुम हो,
तुम ही घर की शान हो,
नारी तुम खुद की पहचान हो.
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संस्कार को देने वाली,
प्रेम सभी से करने वाली,
सृजन की पहचान हो,
नारी तुम खुद की पहचान हो.
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तुम्ही अंगनी, तुम्हीं वंदनी,
तुम्हीं संगनी, तुम्हीं नंदनी,
तुम ही लय और तान हो,
नारी तुम खुद की पहचान हो.
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तुम ही शिव की शक्ति हो,
तुम ही पावन भक्ति हो,
तुम धरा का मान हो,
नारी तुम खुद की पहचान हो.
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तुम धरा की श्रेष्ठ कृति हो,
ममता, प्रेम की अनुभूति हो,
ईश्वर का प्रतिदान हो,
नारी तुम खुद की पहचान हो.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर
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