श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘ये दुनिया, ये दुनिया…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १०९ ☆
☆ ये दुनिया, ये दुनिया… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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ये दुनिया, ये दुनिया
कैसी है, ये दुनिया,
जैसी नज़र से देखोगे,
लगेगी वैसी ही दुनिया,
ये दुनिया, ये दुनिया,
*
जन्म अकेला, पास न कोई,
सफ़र अकेला, साथ न कोई,
दूर है मंजिल, लंबा रास्ता,
कभी है, समतल, कभी चढ़ाई,
राह नहीं देती ये दुनिया,
ये दुनिया, ये दुनिया,
कभी सुख, कभी दुख मिलता,
जीवन ऊपर नीचे चलता,
*
लोग मिलेंगे, और छूटेंगे,
जीवन भर का साथ न मिलता,
रंग बिरंगी दिखती है पर,
रंगीन नहीं है, ये दुनिया,
ये दुनिया, ये दुनिया,
*
सुख में ये, अपनी बन जाती,
दुख में, दूर नजर है आती,
सुख दुख हो या जीना मरना,
चलती रहती, ये दुनिया,
ये दुनिया, ये दुनिया.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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