श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # २०२ ☆

☆ मुक्तक ।। शत शत नमन हर श्रमिक कामगार को ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

//1//

मेहनत से ही तो आज खड़े ये

सब बंगलें कोठी मकान हैं।

किसान ही तो उपजाते ये सब

खेत और खलिहान हैं।।

कठोर परिश्रम से ही उत्पत्ति

होती प्रगति और विकास की।

लाखों प्रणाम उन श्रमिकों को

जो बना रहे नया हिंदुस्तान हैं।।

//2//

जैसे भवन की नींव वैसे ही तो

श्रम विकास का नींव होता है।

श्रमिक ही अपने खून पसीने

से प्रगति का बीज बोता है।।

उद्योग व्यापार कार्यालय जहाँ

देखें श्रमिक को हम पाएंगे।

यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी

कि मजदूर भूखा नहीं सोता है।।

//3//

शत शत नमन राष्ट्र निर्माण के

इन परिश्रमी कर्णधारों को।

थल जल नभ मे रत इन सभी

पुरुषार्थ के आधारों को।।

पसीना सूखने से पहले ही मिले

उचित पारिश्रमिक इन सब को।

बनाया जिसने है इन सड़क

बाँध और हमारे घर दीवारों को।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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