स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता – मत समझ हमको पराया…।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २८४ – मत समझ हमको पराया…२
दोस्त! तू भोला भाला था
क्या नहीं तुझको पता था
यह जमाने का पुराना सिलसिला है
चाहने पर क्या मिला है?
मन जिसे चाहे जहाँ
वह वहाँ
मिलता नहीं है,
सड़क
में कीचड़ बहुत होता
पर कमल खिलता नहीं है।
भुला दे दुख दर्द अपना
छोड़ दे रोना कल्पना
एक शायर ने कहा है-
‘मोहब्बत के अलावा भी और गम है।
एक तेरी ही नहीं
दूसरी भी आँख नम हैं।
क्रमशः…
स्व डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
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