श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “जीवन की बस यही अदा है…। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # २२१ ☆

☆  जीवन की बस यही अदा है…  श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

जीवन की बस यही अदा है।

कब तक किसका साथ बदा है।।

 *

जियो जिंदगी जी भर यारो।

मन पर भारी बोझ लदा है।।

सत्य सनातन की यह बेला।

हनुमत जी की बड़ी गदा है।।

 *

कितना भी वह सत्य छुपा लें।

होना उसकी जीत सदा है।।

 *

नेक राह पर चलना सीखो।

मिले सफलता यदा-कदा है।।

 *

बंग भूमि की दुखद कहानी।

अधिक गरीबी यदा-तदा है।।

 

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

22/5/26

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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