श्री संतोष नेमा “संतोष”

(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी  कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप  कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपकी एक  विचारणीय कविता  – शिव संरचना आप  श्री संतोष नेमा जी  की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)

☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # ३०६ ☆

कविता – शिव संरचना☆ श्री संतोष नेमा ☆

रास्ते में चूने की

लाइन खींचते देख

हमने पूछा भैया क्या

कोई नेता आ रहे हैं….?

बोला नहीं मंदिर

के रास्ते चूने की

लाइन डाल रहे हैं …!

लोगों को भगवान की

राह दिखा रहे हैं …!

हमने कहा लोगों को

क्या मदिर की राह

का ज्ञान नहीं…?

बोला मंदिर क्या

भगवान का ही भान नहीं…!

 

अब तो वह भी भक्तों

को तरसते हैं…?

भक्त है कि भगवान पर ही 

फ़िल्मी स्टाइल में बरसते हैं …!

बोलते हैं आज खुश तो

बहुत होगा तू…जैसा

अहसान सा करते हैं…!

 

फिर भी भोले शंकर

सब के दुःख हरते हैं …!

कुछ तो शिवरात्रि की आड़ में

खुलकर नशा करते हैं…!

पीकर गांजा-भंग

खूब मज़ा करते हैं…!

अब त्यौहार भगवान

के किये कम अपने लिए

ज्यादा हो गए हैं …!

भक्त स्वादानुसार

खान-पान पर

आमादा हो गए हैं …!

“संतोष” भोले को

भोला समझने की भूल

न करना …!

हर अति के अंत की

है शिव संरचना …!

© संतोष  कुमार नेमा “संतोष”

वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार

आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 70003619839300101799

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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