डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के गीत – प्रेम)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३२४ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के गीत – प्रेम ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

प्रेम हवा का मंद झोंका

छूकर मन को जाता है

 जीवन में सुरभित पत्तों सा

हरियाली भर जाती है।

 *

मन में प्रेम के भाव लिए

 प्रेम भाव जगाता है

दुख की तपती राहों में,

शीतल छाँव पाता है।

 *

मीरा बनता प्रेम कभी

कभी राधा का गीत।

प्रेम छुपा माँ ममता में,

कभी सखी का गीत।

 *

प्रेम केवल प्रेम नहीं,

प्रेम मन का  पावन गान।

प्रेम है उपवन में छाया

मधुर मधुरिम बाहर।।

 *

जहाँ प्रेम के दीप जले,

मिटे वहाँ अंधियार।

प्रेम कटुता दूर करे,

महके हर परिवार।।

 

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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