डॉ सत्येंद्र सिंह

(वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सत्येंद्र सिंह जी का ई-अभिव्यक्ति में स्वागत। मध्य रेलवे के राजभाषा विभाग में 40 वर्ष राजभाषा हिंदी के शिक्षण, अनुवाद व भारत सरकार की राजभाषा नीति का कार्यान्वयन करते हुए झांसी, जबलपुर, मुंबई, कोल्हापुर सोलापुर घूमते हुए पुणे में वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी के पद से 2009 में सेवानिवृत्त। 10 विभागीय पत्रिकाओं का संपादन, एक साझा कहानी संग्रह, दो साझा लघुकथा संग्रह तथा 3 कविता संग्रह प्रकाशित, आकाशवाणी झांसी, जबलपुर, छतरपुर, सांगली व पुणे महाराष्ट्र से रचनाओं का प्रसारण। जबलपुर में वे प्रोफेसर ज्ञानरंजन के साथ प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े रहे और झाँसी में जनवादी लेखक संघ से जुड़े रहे। पुणे में भी कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वे मानवता के प्रति समर्पित चिंतक व लेखक हैं। अप प्रत्येक बुधवार उनके साहित्य को आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक अप्रतिम  – “श्री कृष्ण भजन “।)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ सत्येंद्र साहित्य # ६५ ☆

✍ श्री कृष्ण भजन .. ☆ डॉ सत्येंद्र सिंह ☆

राधे राधे बोल, मनवा राधे राधे बोल,

कृष्ण नाम की महिमा सबसे है अनमोल।

*

श्याम तेरी बंसी की मीठी ये तान है,

सुनके इसे झूमे सारा जहान है।

राधा के मनमोहन, मुरलीधर घनश्याम,

तेरे चरणों में ही मेरा सम्मान है॥

*

राधे-राधे बोल, मनवा राधे-राधे बोल,

कृष्ण नाम की महिमा सबसे है अनमोल॥

**

यमुना किनारे तूने रास रचाया,

गोपियों के संग प्रेम दीप जलाया।

माखन चुराकर हर लिया सबका मन,

भक्तों के जीवन को दिया खुशियों से भर ।।

*

राधे-राधे बोल, मनवा राधे-राधे बोल,

कृष्ण नाम की महिमा सबसे है अनमोल॥

**

गीता का ज्ञान दिया अर्जुन को रण में,

सत्य की राह दिखाई जीवन के क्षण में।

दीनों के सहारे, दुखियों के रखवाले,

तेरे बिना सूने सब मंदिर और शिवाले॥

*

राधे-राधे बोल, मनवा राधे-राधे बोल,

कृष्ण नाम की महिमा सबसे है अनमोल॥

**

मेरे भी जीवन में आओ नंदलाला,

भक्ति से भर दो ये मन की मधुशाला।

तेरी कृपा से ही हर काम बनेगा,

नाम तेरा लेते ही जीवन सँवरेगा॥

*

जय-जय श्री राधे, जय-जय श्री श्याम,

भक्तों के हृदय में बसते आठों याम॥

© डॉ सत्येंद्र सिंह

सम्पर्क : सप्तगिरी सोसायटी, जांभुलवाडी रोड, आंबेगांव खुर्द, पुणे 411046

मोबाइल : 99229 93647

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सत्येंद्र सिंह जी, मधुर भक्ति रचना लिखी है। हार्दिक बधाई🎉🎊