श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “गिला शिकवा नहीं करते…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १५३ ☆
गिला शिकवा नहीं करते… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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अभी हिम्मत नहीं हारी हमारी
फ़तह की अब रही बारी हमारी
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न होना रार है माशूक़ से फिर
ख़ता बतलाइये सारी हमारी
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मुसीबत कोई आये बे-असर है
अगर रहती है तैयारी हमारी
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तू नामुमकिन तभी बतला रहा है
अभी देखी न दमदारी हमारी
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अमानत दोसतों की जान बोला
परखने आ गए यारी हमारी
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गिला शिकवा नहीं करते वो हरगिज़
समझते है जो लाचारी हमारी
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तुम्हारी हरकतों को रोक तो दूँ
खड़ी है बीच बेज़ारी हमारी
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सिखाया इल्म है उस्ताद का ये
ग़ज़ल में कब कलाकारी हमारी
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न रंभा मेनका के है ये वश का
अरुण जो तोड़ दें तारी हमारी
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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