श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ७२ ☆
☆ लघुकथा ☆ ~ जब लग गंग, जमुन जल धारा ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆
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संजना प्रतिदिन यमुना के तट पर जाती और माँ यमुना से अपने बीमार पति की लम्बी उम्र का वरदान मांगती। वह यमुना को स्वच्छ देखना चाहती थी। लेकिन यमुना के जल में बहते कूड़ा करकट और मलबे को देखकर उसका मन विचलित हो जाता था। आख़िरकार उसने यमुना को स्वच्छ रखने का बीड़ा उठा लिया। प्रारंभ में उसने अकेले, लेकिन बाद में एक बहुत बड़े समूह को साथ लेकर चलना शुरू किया। उसने इस कार्य को मिशन बना लिया।
बरसों पहले उसकी अपनी ही शादी के फेरे के समय गायी गई यह पंक्ति कि..”जब लग गंग, जमुन जल धारा। अमर रहे अहिवात तुम्हारा।।” आज तक उसके कान में गूँज रही थी l
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© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”
लखनऊ, उप्र, (भारत )
दिनांक 22-02-2025
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





