श्री हेमंत तारे 

श्री हेमन्त तारे जी भारतीय स्टेट बैंक से वर्ष 2014 में सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्ति उपरान्त अपने उर्दू भाषा से प्रेम को जी रहे हैं। विगत 10 वर्षों से उर्दू अदब की ख़िदमत आपका प्रिय शग़ल है। यदा- कदा हिन्दी भाषा की अतुकांत कविता के माध्यम से भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त किया करते हैं। “जो सीखा अब तक,  चंद कविताएं चंद अशआर”  शीर्षक से आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका है। आज प्रस्तुत है आपकी एक  विचारणीय कविता – वॉट्सएप्प, इन दिनों…!)

✍ वॉट्सएप्प, इन दिनों…! ☆ श्री हेमंत तारे  

न कबीर, रहीम, रसखान के दोहे,

न ग़ालिब कि गजलें,

न कामायनी पर चर्चा,

और

न कोई यात्रा वृतांत।

किसी

लुटि पिटी बेवा सा लगता है

वॉट्सएप्प, इन दिनों ।

 

सुना है,

ये सब साझा करने वाले हाथ

फरमा रहे हैं आराम

क्योंकि,

ज़ेरे ईलाज

और

दाखिले अस्पताल है

इन दिनों

दोस्त मेरा ।

 

यकीं है मुझे

दिन, दो दिन में

फिर वॉट्सएप्प पर

ताजा दम

लौटेगा,

दोस्त मेरा ।

© श्री हेमंत तारे

मो.  8989792935

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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जगत सिंह बिष्ट
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