श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “वृद्ध आदमी…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २४२ ☆
☆ # “वृद्ध आदमी…” # ☆
☆
जीवन के अंतिम पहर में
अपने ही दौड़ते हुए शहर में
अपने ही रहते हुए घर में
वृद्ध आदमी अनजान सा रहता है
सभी प्रसन्न है ,मस्त है
सभी रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त है
सभी निपुण और सिद्ध हस्त है
वृद्ध आदमी चुपचाप सब देखता है
आंगन में चिड़ियों की चहचहाहट है
हवाओं मे किरणों की गर्माहट है
वाटिका में भंवरो के आगमन की आहट है
वृद्ध आदमी फूलों की सुगंध के साथ बहता है
बाहर भीड़ है पर वह अकेला है
कोई उसे नहीं पूछने वाला है
रंगीनियों का लगा हुआ मेला है
वृद्ध आदमी मन मसोस कर सब कुछ सहता है
उसका होता तिरस्कार रोज है
परिवार पर वह एक भारी बोझ है
शायद वह दूसरी दुनिया की खोज है
वृद्ध आदमी सब सहकर भी कुछ नहीं कहता है
जीवन भर रिश्तो को जोड़ता है
जीवन भर धाराओं को अपनी ओर मोड़ता है
विषम परिस्थितियों में भी संघर्ष नहीं छोड़ता है
वृद्ध आदमी मरते मरते भी खुश रहो सबको कहता है /
☆
© श्याम खापर्डे
फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो 9425592588
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





