डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – मौसम)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३०२ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – मौसम ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

मौसम बदला आज कुछ, धुंध हुई कुछ साफ।

ठंडी -ठंडी चली हवा, हमने ओढ़ लिहाफ।।

 *

सूरज डूबा देख लो, मोहक होती शाम।

रजनी का आमंत्रण है, सपनों में मुलाकात।।

 *

चादर तम की भीतरी, चाँद झाँकता आज।

कितनी सुंदर चाँदनी, बज उठे हैं साज।।

 *

सूरज कंबल ओढ़ता, उसे लगी है ठंड।

चादर कुहरे की बढ़ी, मिला सभी को दंड।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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