श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # १८६ ☆

☆ ग़ज़ल ।। शख्स नहीं कि शख्सियत बन कर जिए आदमी ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

।। काफिया – दार ।। रदीफ – होना चाहिए।।

=1=

आदमी को    साहिबे   किरदार होना चाहिए।

जिंदगी में आदमी को जिम्मेदार होना चाहिए।।

=2=

जिंदगी कुछ ऐसा बन कर ही  जिए आदमी।

हर मुकाम जिंदगी का यादगार होना चाहिए।।

=3=

बात जब भी   किसी    निशाने   की आए तो।

निशाना तो बस अचूक कारगार ही होना चाहिए।।

=4=

शख्स नहीं कि शख्सियत बन कर जिए आदमी।

कुछ और न हो बस आदमी खुद्दार होना चाहिए।।

=5=

ऊपरवाले का एक नायाब तोहफा है यह जिंदगी।

इसलिए जिंदगी से बस   वफादार होना चाहिए।।

=6=

हजारों सुख-दुःख के रंग मिलते हैं एक उमर में।

हर बात का हीआदमी को कद्रदार होना चाहिए।।

=7=

स्याह सफेद हर रंग जरूरी है जिंदगी के लिए।

बस आदमी को जरूर जवाबदार होना चाहिए।।

=8=

कदम कदम पर मिल रहा है दुनिया में धोखा।

हर आदमी को आज बस खबरदार होना चाहिए।।

=9=

हंस जरूरी हो गया है   आज इस जमाने में।

हर हालात में आदमी नहीं दागदार होना चाहिए।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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