श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “श्रद्धांजलि…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २४३ ☆
☆ # “श्रद्धांजलि…” # ☆
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आंखों में आंसू लब पर तेरी कहानी है
व्यथित हैं वंचित शोषित
गमगीन जवानी है
पिघल रहे हैं हिमखंड बहते धारे है
हमसे बिछड़े थे जो वह आज प्राण हमारे हैं
उजड़ गया है उपवन पतझड़ के मारे हैं
कांटो से चुभने लगे अब जो सहारे हैं
किससे करें फरियाद आंखों में पानी है
आंखों में आंसू लब पर तेरी कहानी है
तुम लाए थे गगन से तोड़कर तारे
जगमगाई थी कुटिया घर द्वार हमारे
रोशन हुए थे आंगन और चौबारे
कैसे भूलेंगे हम उपकार तुम्हारे
जीवन भर हम पर आपकी मेहरबानी है
आंखों में आंसू लब पर तेरी कहानी है
आपने हमको पढ़ना सिखाया
संगठित कर लड़ना सिखाया
दीक्षा दी हमें धम्म की
धम्म के मार्ग पर चलना सिखाया
धम्म के मार्ग पर चलते-चलते
मंजिल अपनी पानी है
आंखों में आंसू लब पर तेरी कहानी है
हम चिंतित है पर हारे नहीं है
हम विघटित है पर बेचारे नहीं है
सागर कितना भी उफान पर हो
हम विचलित है पर बेसहारे नहीं है
लड़ कर पाएंगे मंजिल अब डरना बेमानी है
आंखों में आंसू लब पर तेरी कहानी है
व्यथित हैं वंचित शोषित गमगीन जवानी है /
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© श्याम खापर्डे
फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो 9425592588
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