श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “साथ निभाना साथी…। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # २००  – साथ निभाना साथी… ☆

मेरा साथ निभाना साथी।

मुझे छोड़ मत जाना साथी।।

*

फेरे लिए अग्नि-पथ के हैं ।

प्रेम सुधा बरसाना साथी।।

*

सुख-दुख तो आना-जाना है।

इससे मत घबराना साथी।।

*

जीवन पथ पर चलें निरंतर।

कुछ भी नहीं छिपाना साथी।।

*

मेरा जो वह सब तेरा है।

ऐसे भाव मिलाना साथी।।

*

पथ पथरीले राह कठिन है।

उलझन सभी मिटाना साथी।।

*

ऊँचीं-ऊँचीं बनीं सीढ़ियाँ।

गहकर हाथ चढ़ाना साथी।।

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

27/11/25

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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