श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # १८७ ☆

☆ मुक्तक ।। अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस 11 दिसंबर ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

=1=

पर्वत ही तो हरियाली को बचा कर रखते हैं।

पर्वत मौसम की लाली बचा कर रखते हैं।।

पर्वत श्रृंखला खनिज पत्थर से होती भरपूर।

पर्वत जीवन की खुशहाली बचा कर रखते हैं।।

=2=

मत छेड़ो प्रगति के लिए हर पर्वत माला को।

नहीं तो पाओगे भूस्खलन की ही हाला को।।

आसमान को छूते यह मनोरम दृश्य दिखाते हैं।

पर्वत सहेज कर रखते हैं लोक नृत्य शाला को।।

=3=

भारत का मुकुट हिमालय  पर्वत महान है।

संजीवनी बूटी के लिए  उठा लाए हनुमान हैं।।

कृष्ण ने बृज रक्षा करी थी गिरि राज पर्वत से।

पर्वत रक्षा ही प्रकृति रक्षा  की होती प्राण है।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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