आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय रचना – दोस्त)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २६० ☆
☆ सामयिक गीत – दोस्त ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆
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दोस्त है तो दोस्ती दिल से निभा
दोस्त को दिल में हमेशा तू बसा
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दोस्त दिलवर दिलरुबा चाहे न हो
दोस्त को देना नहीं यारां दगा
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दोस्ती ही दोस्त को उपहार है
दोस्त से बढ़कर न कोई भी सगा
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दोस्त हों श्रीकृष्ण-अर्जुन की तरह
दोस्त दुर्योधन न दे मरवा खुदा
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दोस्त पर कर जान भी कुर्बान तू
दोस्त की भाती ‘सलिल’ को हर अदा।
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© आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’
१९.११.२०२५
संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,
चलभाष: ९४२५१८३२४४ ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





