स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी द्वारा रचित – “कविता – हर खबर देता यही अख़बार है…” । हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।)
☆ काव्य धारा # २५२ ☆
☆ हर खबर देता यही अख़बार है… ☆ स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ☆
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हर सुबह पहली खबर देता यही अखबार है
देश में नई समस्याओं का लगा अम्बार है।
एक का जब तक निकल पाता कोई हल
तभी दूसरी अपनी उपस्थिति दिखाने तैयार है।
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लोगों के नियमों के पालन के नहीं हैं हौसले
कानून के विपरीत खुद करने लगे अब फैसले।
विधायको सांसदों के अटपटे व्यवहार हैं
राजनैतिक दलों में नित दिखती नई तकरार है।
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जनता, शासक, सेवकों के सुनिश्चित कर्तव्य हैं
भूल से गये है सभी पर शायद निज गन्तव्य है।
रास्तों पर उलझनों का बढ़ता जाता भार है
लगता है अब लोक तंत्र हमारा बीमार है।
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मुँह से तो सब कहते हैं कि शांति-सुख हो देश में
काम पर करते हैं जिससे हिंसा है परिवेश में
डर से जन-मन का डिगा दिखता विश्वास है
बढ़ रही शंका कुशंका घटा मन का प्यार है।
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बढ़ाना तो चाहती सुविधायें सब सरकार है
हिंसा से पर साधना सब हो रही बेकार है।
लोगों को प्रिय सदा ही रहा निज संस्कार है
पर दुराचारी के उपद्रवो की भरमार है ।
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© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
ए २३३ , ओल्ड मीनाल रेजीडेंसी भोपाल ४६२०२३
मो. 9425484452
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





