डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – नव वर्ष)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३०४ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – नव वर्ष ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

बीते कल की सीख से, जगता नव विश्वास।

 ले आया नव वर्ष है, मन में नवल उजास ।।

 *

अब तो देखो ढल रही, ढली दिसंबर शाम।

बीते लम्हें को करें, दिल से सभी सलाम।।

 *

करते हम तो अलविदा, बीता प्यारा वर्ष।

नमन साल को कर रहे, खूब मनाओ हर्ष।।

 *

समय कभी रुकता नहीं, समय सिखाता सीख।।

जिसने कीमत समझ ली, मांगे समय न  भीख।।

 *

चक्र समय का घूमता, घूम रहा दिन रात ।

समय रेत सा फिसलता, करो समय से बात।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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