श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता नई सुबह…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २४६ ☆

☆ # “नई सुबह…” # ☆

बीत गई रात बीत गया साल

क्षितिज पर चमक रहा अरुणम भाल

आरक्त  हो गए वसुंधरा के गाल

दिशाएं गा रही नये सुर-ताल

 

सुबह की पवन मदमस्त कर रही है

टूटे हुए बदन में ऊर्जा भर रही है

अंगड़ाई लेती तरुणाई जाग रही है

रसिकों की टोली छूने को डर रही है

 

वाटिका में चटकती हुई कलियाँ  है

भंवरे घूम रहे बनकर छलिया है

यौवन का भार लिए डालियाँ है

भ्रमर कर रहे अठखेलियाँ है

 

पागल भंवरे घूम रहे हैं

कलियों को चूम रहे हैं

वाटिका में मदमस्त आलम है

मादक नशे में भंवरे झूम रहे हैं

 

पूरब से नई पवन बह रही है

नया संदेश सबसे कह रही है

जीना है तो खुलकर जियो

पुरानी परंपराएं  धीरे-धीरे ढह रही है

 

नई सुबह नए गीत लेकर आई है

नई सुबह नए मीत लेकर आई है

नई सुबह ने खुशबू लुटाई  है

नहीं सुबह  नई प्रीत लेकर आई

 

नई सुबह के साथ चलो हम भी होलें

कटुता को भूलकर प्रेम के दरवाजे खोलें

हम सभी उस महामानव के अंश है

आपस में सांप्रदायिकता का जहर ना घोलें /

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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