डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – विश्व पृथ्वी दिवस।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३१९ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – विश्व पृथ्वी दिवस ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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संकट भारी आ पड़ा, धरा बचा लो आज।
मानव प्रकृति सहेजना, फिर शोभित सब काज।।
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बहुत बढ़ी अवहेलना, जगत हुआ है त्रस्त।
नर जीवन अनमोल है, इसे न करना पस्त।।
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होती फिर बंजर धरा, पर्वत जंगल नाश।
आने वाली पीढ़ियाँ, फिर ढोएँगी पाश।।
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नजर जहाँ भी जा रही, बहुधा प्लास्टिक ढेर।
रोक सको तो रोक लो, क्यों? करते हो देर।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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